बरेली। एलन क्लब मामले में हार से बचने के लिए नगर निगम प्रशासन ने एक कदम आगे बढ़कर अपनी चाल चल दी है। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता शिरीष मेहरोत्रा ने सिविल कोर्ट मे कैविएट दाखिल की है। नगर निगम के वकील शिरीष मेहरोत्रा ने नगर आयुक्त की ओर से कैविएट लगाते हुए कहा कि इस मामले में न्यायालय कोई भी आदेश देने से पहले नगर निगम के पक्ष को भी सुने।
वर्ष 1908 में अंग्रेजी सरकार के मजिस्ट्रेट असगर अली खान के निर्देशन में एलन यूनियन क्लब का निर्माण हुआ था। यह क्लब तीन एकड़ जमीन में फैला हुआ है, जिसमें स्विमिंग पूल, ओपन स्पेस, क्लब और बैडमिंटन कोर्ट है। पिछले दिनों जांच में सामने आया कि 1931 में क्लब की लीज तीस साल के लिए हुई, जिसे 1908 से लागू माना गया। नियमानुसार एक बार लीज होने के बाद दो बार नवीनीकरण होकर इसका समय 90 साल से अधिक नहीं हो सकता। इस तरह 1998 में इसकी लीज खत्म हो गई और उसके बाद इसका आज तक नवीनीकरण नहीं हुआ। इस तरह क्लब का संचालन अवैध हो गया और नगर निगम ने इसे कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने शासन के साथ ही मामले की सूचना कमिश्नर और जिला प्रशासन को भी दे दी। इसी बीच चर्चा शुरू हो गई कि एलन क्लब की कमेटी कोर्ट में जाने की तैयारी में है। कमेटी ऐसा कोई कदम उठाती, उससे पहले ही नगर निगम ने कैविएट दाखिल कर दी ताकि उनकी कार्रवाई के लिए कोई का सहारा न लिया जा सके।