बरेली। लूट के एक मुकदमे में सुबूतों के अभाव में कोर्ट ने अभियुक्तों बरी कर दिया, लेकिन विवेचना में की गई लापरवाही पर विवेचनाधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा कर दी। मामला एडीजे मुहम्मद अहमद खां की कोर्ट का है।
1 सितंबर 14 को रामपुर बाग की है। कमल शर्मा ने लिखाई रिपोर्ट में कहा कि अजय अग्रवाल के रामपुरबाग स्थित निवास पर कुछ हथियार बंद लोग रात के साढ़े नौ बजे घुस गए। अजय अग्रवाल नहीं मिले तो नौकरों से मारपीट की और कीमती सामान लूट लिया। अभियोजन की ओर से इस मामले में कुल ग्यारह गवाह पेश किए गए। ज्यादातर गवाह पुलिस को दिए गए अपने बयानों से मुकर गए । अदालत ने इस मामले में अभियुक्त बनाए गए नासिर, राजू, जान एरिक मन्नास व बिल्लू उर्फ रोहित राठौर को सुबूतोें के अभाव में बरी कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र भडाना ने पक्ष रखा। कोर्ट ने मुकदमे के विवेचक अनिल सामरिया को विवेचना मेें लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए लिख दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवेचक ने नौकरों से मुल्जिमान की शिनाख्त नहीं कराई। अदालत ने आवश्यक कार्यवाही के लिए फैसले की एक प्रति जिला मस्जिट्रेट को भेजने का भी आदेश दिया।