तिलहर (शाहजहांपुर)। महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि जो संसार में असंभव को संभव कर दे,दुर्लभ कार्य को सुलभ कर दे उसी को हनुमान कहते हैं। वह रविवार को हनुमत कथा के समापन मौके पर बोल रहे थे।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रांगण में चल रही हनुमंत कथा में स्वामी जी ने कहा कि हनुमान जी ने लंका जलाने जैसा महान कार्य करने के बाद भी मां जानकी के समक्ष सूक्ष्म रूप में प्रकट हुए और जानकी के पूछने पर हनुमान जी ने कहा कि लंका को आग ने नहीं पावक ने जलाया है। भगवान के भक्तों को यदि कोई त्रास देगा तो प्रभु के शेष रूपी पावक में जलकर भस्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि लंका दहन के समय हनुमान जी की पूंछ नहीं जली क्योंकि पावक में मां सीता का निवास था। हनुमंत इस रहस्य को जानते थे कि रावण ने जिस सीता का अपहरण किया वह मूल प्रकृति जानकी नहीं थी। मूल जानकी को तो श्री राम ने पावक में छुपा दिया था। कहा कि व्यक्ति जब भक्ति की ओर बढ़ता है तो उसके जीवन में लोभ व आलस्य आ जाता है। सुरसा जीवन का अहंकार है जिसका कोई अंत नहीं,अहंकार से जीतने का एक ही रास्ता है कि छोटा बन जाओ। हनुमान इसीलिए छोटे बन गए। हनुमान जी ने सोचा कि मैं बड़ा छोटा होने के लिए नहीं चला था। मेरा उद्देश्य सीता जानकी की खोज करना है मैं अपने उद्देश्य से क्यों भटकूं।
कथा के समापन पर महामंडलेश्वर ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के नवीन कंप्यूटर का कक्ष का पूजन करके शुभारंभ किया। अंतिम दिन कार्यक्रम में विजय अग्रवाल व उनकी धर्मपत्नी मंजू अग्रवाल,अमित अग्रवाल, शपथ, राजेश कुमार दुबे सपत्नीक यजमान बने। इस अवसर पर लखन मुनि, आनंद प्रकाश हरबोला, अशोक अग्रवाल, नरेंद्र कुमार अग्रवाल आदि रहे।