बरेली। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) में चलने वाली केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में अनियमितताओं की जांच करने केे लिए लखनऊ से ऑडिट टीम मंगलवार को विकास भवन पहुंची। ऑडिट टीम ने डीआरडीए कर्मियों से सांसद निधि, विधायक निधि, प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा आदि के अभिलेख तलब कर जांच शुरू कर दी। एनआरएलएम में गठित स्वयं सहायता समूहों के अभिलेख टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए। एनआरएलएम के स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले रिवॉल्विंग फंड और बैंक लोन के अभिलेख एक पुराने कर्मचारी ने गायब कर दिए हैं। नये कर्मचारी को ये रजिस्टर दफ्तर की अलमारियों में नहीं मिल रहे हैं। अनियमितताओं पर पर्दा डालने के लिए ऑडिट टीम की जमकर आवभगत की जा रही है।
ऑडिट टीम के सीनियर ऑडिटर जेपी वर्मा और देवेंद्रनाथ आर्य मंगलवार को दोपहर बाद विकास भवन पहुंचे। दोनों सीनियर ऑडिटर कम से कम तीन दिन डीआरडीए के दफ्तर में ही रहकर सांसद निधि, विधायक निधि, प्रधानमंत्री आवास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मनरेगा आदि योजनाओं में खर्च हुए बजट और कामों की जांच करेंगे। पहले दिन ऑडिट टीम ने विधायक निधि और एनआरएलएम के अभिलेख तलब किए। विधायक निधि के अभिलेख तो मिल गए, लेकिन एनआरएलएम के रजिस्टर दफ्तर में नहीं मिल रहे हैं। एसजीएसवाई के रिवॉल्विंग फंड और बैंक लोन लेकर निष्क्रिय हुए डिफॉल्टर स्वयं सहायता समूहों में से अधिकांश को एनआरएलएम में कन्वर्ट कर उनको एक एनजीओ के माध्यम से चलाने की कोशिश हो रही है। विभिन्न बैंकों ने 350 से ज्यादा फर्जी समूहों के खाता संचालन पर रोक लगा रखी है।