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अनाथालय जमीन प्रकरणः इंतकाल के अरसे बाद मुन्नाजान के नाम से कौन कर गया दस्तखत!

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बरेली। आर्यसमाज अनाथालय जमीन प्रकरण की जांच में यह समाने आया है कि अनाथालय ने मुंशी मुन्नाजान नाम के शख्स से वर्ष 1927 में जमीन की खरीद की थी। उनकी बीवी और बेटे ने वर्ष 1952 में दूसरी जमीन का बैनामा किया है, इसमें मुन्नाजान की बीवी ने खुद को बेवा बताया है। जबकि अनाथालय की जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले दूसरे पक्ष का कहना है कि मुंशी मुन्नाजान ने वर्ष 1972 में अनाथालय की जमीन के बैनामे पर दस्तखत करके उसकी बिक्री की है। अब सवाल उठता है कि जब 1952 में कराए गए बैनामे के अनुसार मुन्नाजान जीवित ही नहीं हैं तो 1972 में मुन्नाजान ने जमीन कैसे बेच दी। अनाथालय प्रबंधन की तरफ इस बाबत डीएम से नामित विवेचक सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला को इसके दस्तावेज भी मुहैय्या कराए हैं।
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अनाथालय प्रबंधन ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से शिकायत की थी कि अनाथालय की जमीन पर माफिया फिर से कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि इस जमीन पर उनका स्वामित्व है। जनवरी 2018 में इस जमीन पर पक्की दीवार बनाकर अतिक्रमण करने की कोशिश की गई थी, लेकिन प्रशासन ने इसका निर्माण रोकते हुए दीवार ढहा दी थी। अब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला ने मंगलवार को दूसरे दिन भी पहुंचकर अनाथालय में पूर्व में ध्वस्त कराई गई दीवार का मुआयना किया। इसके बाद अनाथालय प्रबंधन से जुड़े लोगों के साथ मीटिंग कर उनके दस्तावेज भी चेक किए। अनाथालय प्रबंधन के प्रधान हर्षवर्धन ने सिटी मजिस्ट्रेट को जमीन के कागजात दिखाते हुए बताया कि अनाथालय ने वर्ष 1927 में मुंशी मुन्नाजान से 8694 गज जमीन की खरीद की थी। जबकि दूसरा पक्ष का दावा है कि उसने इस जमीन को वर्ष 1972 में खरीदा गया है। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन पर कब्जा लेने के लिए 46 साल तक लंबा इंतजार क्यों किया गया? इसके अलावा हर्षवर्धन ने यह भी दस्तावेज सिटी मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत किए, जिसमें मुंशी मुन्नाजान के बेटे दिलावर हुसैन और बीवी मुसम्मात निजामन ने वर्ष 1952 में एक दूसरी जमीन की बिक्री की थी। उसमें उन्होंने खुद को बेवा बताया था। इस आधार पर अनाथालय प्रबंधन ने यह दलील पेश की है कि जब इस रिकार्ड के हिसाब से मुंशी मुन्नाजान उस वक्त दुनिया में नहीं थे तो दूसरा पक्ष 1972 में जमीन की बिक्री पर आखिर किस मुंशी मुन्नाजान से खरीद की बात कह रहा है।

 मेरी जांच में यह मामला सामने आया है कि मुंशी मुन्नाजान का इंतकाल काफी पहले हो गया था, जबकि अनाथालय की जमीन के मालिकाना हक का दावा करने वालों ने उसके बाद की रजिस्ट्री दिखाई है, उसमें मुंशी मुन्नाजान के दस्तखत बताए गए हैं। हालांकि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। फिर भी वह इस मामले की रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंपेंगे।
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- अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट

‘अनाथालय जमीन पर कब्जा करने के मामले की जांच करने आए सिटी मजिस्ट्रेट को संबंधी जमीन के महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। अनाथालय के पास जमीन संबंधी सभी रिकार्ड मौजूद हैं।’
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- हर्षवर्धन, प्रेसीडेंट, आर्यसमाज अनाथालय
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