बरेली। रिठौरा राशन घोटाले की प्रशासनिक जांच पूरी कर एडीएम फाइनेंस ने अपनी रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। इस जांच रिपोर्ट में राशन घोटाले को रफादफा करने के लिए इंस्पेक्टर हाफिजगंज और रिठौरा चौकी इंचार्ज को सीधे तौर पर दोषी करार दिया गया है, जबकि डीएसओ को अफसरों को गुमराह कर सरकारी राशन को गैरसरकारी साबित करने के लिए पूरा मामला मंडी समिति की तरफ मोड़ने का जिम्मेदार बताया गया है। एसएफसी के जिला प्रबंधक समेत कई अन्य लोगों को राशन घोटाले के लिए सीधा दोषी करार दिया गया है।
राशन घोटाले की परतें खुलने का सिलसिला 27 नवंबर की शाम को तब शुरू हुआ जब तत्कालीन एसपी देहात डॉ. सतीश कुमार ने रिठौरा में कमल गुप्ता की आढ़त पर छापा मारकर वहां 70 बोरे सरकारी चावल से लदा एक मिनी ट्रक ड्राइवर समेत पकड़ा था। एसपी ने पकड़ा गया सरकारी चावल, ड्राइवर और आढ़त मालिक कमल गुप्ता को थाना हाफिजगंज की पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। इत्तफाक से उसी रात उनका ट्रांसफर आदेश आया और अगले दिन वह रिलीव हो गए। इसके बाद चार दिन तक थाने में राशन माफिया से सौदेबाजी खेल चलता रहा। आखिर में 35 लाख में मामला लॉक हुआ। मामले की जांच कर रहे तत्कालीन प्रभारी एसडीएम अशोक कुमार शुक्ला की भूमिका पर भी कई सवाल उठे थे। डीएम ने पूरे मामले की प्रशासनिक जांच एडीएम फाइनेंस मनोज कुमार पांडेय को सौंपी थी। अब 28 दिन बाद उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को सौंप दी है।
सूत्रों के मुताबिक एडीएम की जांच रिपोर्ट में सबसे मुख्य खलनायक पुलिस को करार दिया गया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने पकड़े गए मिनी ट्रक के ड्राइवर वीरपाल और राशन माफिया कमल गुप्ता को थाने से ही छोड़ दिया। कमल गुप्ता से यह भी लिखवाकर ले लिया कि पकड़ा गया अनाज उसका नहीं है। उसे किसी ने फंसाने के लिए मिनी ट्रक उसकी आढ़त पर लाकर खड़ा कर दिया था। कमल गुप्ता के इसी बयान के आधार पर सरकारी चावल को निजी करार दे दिया गया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर डीएसओ सीमा त्रिपाठी फौरन मौके पर पहुंची होतीं तो दोषियों पर समय रहते कार्रवाई हो जाती। इस तरह जांच रिपोर्ट में हाफिजगंज इंस्पेक्टर सौरभ सिंह, रिठौरा चौकी प्रभारी सुनील राठी, डीएसओ सीमा त्रिपाठी, एसएफसी जिला प्रबंधक संतोष सिंह, भुता गोदाम प्रभारी सुमित्र पाल को दोषी करार दिया गया है। बता दें कि भुता गोदाम प्रभारी सौमित्रपाल सिंह पर कार्रवाई के लिए मुख्यालय लिखा जा चुका है। पूर्ति निरीक्षक दिलीप कुमार और लिपिक पवन कुमार को सस्पेंड किया जा चुका है। सरकारी चावल के साथ पकड़ा गया मिनी ट्रक का ड्राइवर/ मालिक वीरपाल गिरफ्तार किया जा चुका है।
बुरी तरह घिरीं डीएसओ सीमा त्रिपाठी जांच रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- डीएसओ सीमा त्रिपाठी ने पकड़े गए राशन की जांच करने के बजाय लीपापोती की। राशन अगर सरकारी नही भी था और उसका कोई दावेदार सामने नहीं आ रहा था तब भी संदेह के आधार पर मामले की रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नही किया गया।
- डीएसओ ने पूरे मामले को मंडी समिति की तरफ घुमाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी दावा किया था कि बरामद राशन प्राइवेट है। मंडी शुल्क का भुगतान नहीं पाया गया। सीमा त्रिपाठी ने घटना के दिन ही इस मामले को लेकर प्रभारी एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट अशोक शुक्ल को भी पत्र दिया।
- राशन पीडीएस का होने के बावजूद उसकी जांच में लापरवाही करने के साथ ये तथ्य भी छिपाया गया कि आढ़ती कमल गुप्ता के भाई और कई रिश्तेदारों के पास कोटे की दुकानें हैं।
- पुलिस ने राशन पकड़े जाने का मामला संदिग्ध होने के बावजूद आढ़ती कमल गुप्ता और गाड़ी ड्राइवर वीरपाल को थाने से छोड़ दिया।
- पुलिस फौरन कार्रवाई के बजाय ढिलाई बरतती रही। भुता की गाड़ी और गाड़ी मालिक का पता चल जाने के बावजूद एक्शन लेने में देरी हुई।
एडीएम एफआर मनोज कुमार पांडेय ने रिठौरा राशन घोटाले की जांच रिपोर्ट मुझे दे दी है, लेकिन व्यस्तता की वजह से अभी उसे देख नहीं पाया हूं। जांच रिपोर्ट का पूरा अध्ययन करने के बाद ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें लिप्त अफसरों पर सख्त कार्रवाई के लिए जरूरी संस्तुति भी की जाएगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी