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दो गुनी से भी ज्यादा बढ़ गई अस्पताल की लागत

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बरेली। जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती भीड़ का डॉक्टरों पर लोड कम करने के लिए आठ साल पहले सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के तहत 300 बेड के अस्पताल का निर्माण खुर्रम गौंटिया रोड पर स्वीकृत हुआ था। केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों में यह आठ साल बाद भी चालू नहीं हो पाया। आठ साल में अस्पताल निर्माण की लागत बढ़कर दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है। हाल ही में बरेली के नोडल अफसर बनाए गए प्रमुख सचिव गन्ना संजय भूसरेड्डी ने अस्पताल निर्माण की कमियां दूर कर आउटसोर्सिंग से स्टाफ रखने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए थे।
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वर्ष 2014 से पहले तत्कालीन सांसद प्रवीण सिंह ऐरन के प्रयास से बरेली में केंद्र सरकार ने एनआरएचएम की मदद से 300 बेड का अस्पताल बनाने के लिए 35.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इससे मानसिक चिकित्सालय की खाली पड़ी जमीन पर तीन सौ बेड का अस्पताल बनना शुरू हुआ। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2015 तक पूरा होना था, मगर केंद्र की भाजपा सरकार ने आगे का बजट देने में लेटलतीफी की। इसके चलते निर्माण तीन साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया। अब प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर 73 करोड़ से अधिक हो गई है। कुछ काम भी अभी बाकी है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अगर समय पर चालू हो जाता तो जिला अस्पताल के आधे से ज्यादा मरीज इसमें शिफ्ट किए जा सकते थे। इससे जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर लोड भी कम होता। मरीजों को भी आसानी से दवा मिलती।

ओवरलोड बरकरार
अब तक न तो अस्पताल में स्टाफ रखा गया। न ही 300 बेड का अस्पताल चालू हो पाया। जिला अस्पताल में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। क्षमता से अधिक मरीज देखने के चलते जिला अस्पताल के डॉक्टरों, और नर्सिंग स्टाफ में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।
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शहर में 300 बेड के अस्पताल समेत ग्रामीण क्षेत्र में 100 बेड का एक और 50-50 बेड़ के दो सीएचसी, पीएचसी तुरंत चालू कराना सरकार की प्राथमिकता है। अगर स्टाफ नहीं है तो आउटसोर्सिंग से स्टाफ रखकर चालू कराने को कहा गया है। - संजय भूसरेडडी, नोडल अफसर बरेली
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