बरेली। शहर का सबसे भीड़भाड़ वाला इलाका कुतुबखाना को जाम की दिक्कत से निजात मिलने की उम्मीद धीरे-धीरे खत्म हो रही है। ब्रिज कारपोरेशन के अफसर इस प्रोजेक्ट को लेकर इसलिए हाथ पर हाथ धर कर बैठ गए हैं क्योंकि नगर निगम प्रशासन की तरफ से इसे लेकर हरी झंडी ही नहीं मिली है। अब तक दोनों ही निगम के अफसरों के बीच इस परियोजना को लेकर लिखित समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की शुरूआती औपचारिकता ही पूरी नहीं हुई है। ऐसे में इस परियोजना के फिलहाल शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। नगर निगम ने करीब तीन माह पहले कुतुबखाना फ्लाईओवर के प्रोजेक्ट को लेकर कदम आगे बढ़ाए थे। परियोजना की सुगबुगाहट से ही शहर में हलचल मच गई। कुतुबखाना के एक दुकानदारों का गुट पूरी तरह से इसके विरोध में उतर गया। बावजूद इसके नगर निगम के अफसरों ने ब्रिज कारपोरेशन के अधिकारियों से प्रारंभिक सर्वे कराकर यह स्पष्ट कर दिया कि यह प्रोजेक्ट शुरू होना ही है। सेतु निगम के इंजीनियर ने सर्वे में मोटे तौर पर यह स्पष्ट कर दिया कि पुल निर्माण में प्रति मीटर करीब पांच से छह लाख रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से करीब 1600 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर के लिए करीब 80 करोड़ खर्च होने का अंदाजा है।
नगर निगम के स्टाफ ने रोड पर ब्रिज का काम शुरू कराने के लिए अतिक्रमण चिह्नित करते हुए निशान भी लगाए। मगर इसके बाद धीरे-धीरे पूरा प्रोजेक्ट ठंडा पड़ता चला गया। लंबे समय से इस प्रोजेक्ट को लेकर नगर निगम प्रशासन की तरफ से हलचल तकरीबन बंद हो चुकी है।
मेयर उमेश गौतम ने पहले यह कहा था कि चूंकि यह प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी में है। इसलिए शासन से सर्वे करने वाली टीम दिवाली के बाद आएगी, जबकि इस टीम का भी अब तक कोई अतापता नहीं। इधर, सेतु निगम के अफसर नगर निगम से परियोजना को लेकर लिखित समझौता तक न होने की बात कहते हुए उन्होंने भी इस तरफ से मुंह मोड़ लिया है।
फ्लाईओवर को लेकर अब तक नगर निगम से समझौता तक नहीं हो सका है। इसलिए अभी यही तय नहीं है कि निगम इस फ्लाईओवर को बनाने के लिए सहमत है भी या नहीं।
- एसके गर्ग, उप परियोजना अधिकारी, सेतु निगम