गन्ना विभाग ने किसानों के खेत में खड़े गन्ने का दोबारा सर्वे शुरू करा दिया है। गन्ना खरीद में दलाल और बिचौलियों की भूमिका रोकने के लिए चीनी मिल और गन्ना विभाग की संयुक्त टीम कई क्रय केंद्रों पर पहुंची और किसानों से गन्ने की पर्चियां भेजने के संबंध में जानकारी ली। हालांकि गन्ने के सर्वे में ही इतना पेंच है, जिससे किसानों को मजबूरी में अपना गन्ना क्रेशर पर औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है।
अमर उजाला ने ‘यह है किसानों की खुशहाली, 10 महीना पसीना बहाया, 30-40 के मुनाफे कर रहे खेत खाली’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर किसानों तक गन्ने की पर्चियां न पहुंचने का मामला उठाया था। इसमें किसानों की समस्या पर राज्य सरकार के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह समेत क्षेत्रीय विधायकों और किसानों से भी बात की गई थी। समाचार प्रकाशित होने के बाद फरीदपुर चीनी मिल और गन्ना विभाग की टीम खेत में खड़े गन्ने का सर्वे करने के लिए क्रय केंद्रों पर गई। किसानों से गन्ने के बारे में पूछताछ कर लौट गई। तमाम किसानों ने पर्ची न मिलने की शिकायत टीम से की। कुछ किसानों ने यह भी कहा कि उनको जरूरत 10 क्विंटल पर्ची की है, लेकिन मिल रही है चार या पांच क्विंटल की। किसानों ने सर्वे टीम के सदस्यों को बताया कि गन्ना विभाग का हर साल होने वाला सर्वे इस आधार पर किया जाता है कि संबंधित किसान का पिछले साल कितना गन्ना था। अगर कोई किसान पहली बार गन्ने की बुवाई कर रहा है तो चीनी मिल उसका सट्टा ही नहीं बनाते। न ही पहली बार गन्ने की बुवाई करने वाले किसानों को चीनी मिल अपने सट्टे में शामिल करते हैं। इन किसानों को मजबूरी में अपना गन्ना क्रेशर पर या फिर दलालों को बेचना पड़ता है।
पीएम और सीएम को ट्वीट
किसानों ने चीनी मिलों से गन्ने की पर्चियां समय से न पहुंचने के अलावा दलाल और बिचौलिओं के जरिए सस्ते में गन्ने खरीद की स्थिति को बयां करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को ट्वीट भी भेजा। इसमें बताया गया कि आप किसानों की आमदनी दोगुनी करने में लगे हैं, लेकिन सिस्टम किसानों की आमदनी दो गुनी करने की सरकार की मंशा पर पानी फेर रहा है।