बीएससी की छात्रा पिछले साल
के पेपर पर लिखकर लाई नकल
- प्रश्नपत्र देखा और फिर पिछले साल के प्रश्नपत्र से बदल दिया
- कक्ष निरीक्षक ने प्रश्नपत्र देखा तो खुली पोल
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में छात्र नकल करने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं। शुक्रवार को बरेली कॉलेज में चौंकाने वाला मामला सामने आया। बीएससी प्रथम की छात्रा जूलॉजी की परीक्षा में पिछले साल का प्रश्नपत्र लेकर आई। इस पर उतने ही बडे़े अक्षरों में काले पेन से कुछ सवालों के जवाब लिखे, ताकि कोई आसानी से पकड़ न सके। वैसा ही हुआ।
छात्रा पुराना प्रश्नपत्र लेकर परीक्षा कक्ष तक पहुंची। परीक्षा के लिए मिले प्रश्नपत्र के सवाल देखे और फिर उसे छिपा लिया। बड़ी चालाकी से वह कक्ष निरीक्षकों की आंखों में धूल झोंक कर नकल करती रही। एक कक्ष निरीक्षक की नजर पहुंची तो प्रश्नपत्र देखकर वह हैरान रह गए। प्रश्नपत्र पिछले साल का था। छात्रा की कॉपी बुक कर दी गई है। उधर, बीकॉम के एक छात्र के पास चौदह पर्चियां बरामद हुईं। वह अंतर वस्त्र में पर्चियां छिपाकर लाया था। बीए की परीक्षा दे रहा एक दिव्यांग छात्र भी नकल सामग्री ले आया। दिव्यांग होने के कारण उसकी चेकिंग नहीं हुई। एक अन्य युवक उसे परीक्षा कक्ष तक छोड़कर आया। बाद में वह नकल करते पकड़ा गया। शाम की पाली में एमकॉम का एक छात्र कक्ष निरीक्षक से भिड़ गया। काफी हंगामा होने के बाद छात्र की सीट बदली गई।
सिलेबस से बाहर के प्रश्नों पर मांगी एक्सपर्ट की राय
एमए फाइनल इतिहास के पेपर में कई प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस से पूछे गए थे। इसे लेकर बरेली कॉलेज में गुरुवार को हंगामा भी हुआ था। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने शुक्रवार को सभी कॉलेजों से फीडबैक लिया। सभी कॉलेजों ने कहा कि काफी प्रश्न सिलेबस से बाहर के हैं। अब विश्वविद्यालय इस पर एक्सपर्ट की राय लेगा, उसके बाद कोई निर्णय होगा। अगर पचास फीसदी से ज्यादा प्रश्न बारह से आए होंगे तो दोबारा परीक्षा हो सकती है। इससे कम प्रश्न होने पर छात्रों को बोनस अंक मिल सकते हैं। परीक्षा नियंत्रक महेश कुमार ने बताया कि एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
अब भी कई केंद्रों पर कॉपियों में हो रहा खेल
विश्वविद्यालय एक केंद्र पर कार्रवाई करके भले ही मान बैठा हो कि सब कुछ ठीक हो गया, लेकिन ऐसा नहीं है। बरेली के ही कुछ केंद्र ऐसे हैं, जहां कॉपियों के साथ अब भी खिलवाड़ हो रहा है। जिन छात्रों का ठेका हुआ था उनको कॉपियां बाहर से दिलवाई जा रही हैं। ऑडियो में जिन कॉलेजों में नाम हैं, वहां अब भी कॉपियां बाहर भेजी जा रही हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ कॉलेजों को रडार पर लिए हुए है। इन कॉलेजों के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अगर ठोस सबूत मिलते हैं तो इन केंद्रों को भी निरस्त किया जाएगा।