शिक्षक नेताओं ने किया दावा, निर्वाचन आयोग के बयान को शिक्षकों की मौत पर मजाक बताया
बरेली। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत का दावा किए जाने पर शिक्षक भड़क गए हैं। शिक्षक नेताओं ने इसे शिक्षकों की मौत पर मजाक बताते हुए सख्त नाराजगी जताई है। बेसिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने पंचायत चुनाव की वजह से जिले में 31 शिक्षकों की मौत होने का दावा किया है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान ने कहा कि इस तरह का आकलन करना शिक्षकों की मृत्यु के साथ मजाक है। शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देनी चाहिए। अनुसचिव सत्य प्रकाश के उस पत्र को निरस्त कर देना चाहिए जिसमें सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि मौत की गणना सिर्फ चुनाव ड्यूटी से घर आने जाने तक के आधार पर की गई है। इस तरह आकलन गलत है, जबकि कोरोना होने पर व्यक्ति लंबे समय तक जीवन के लिए संघर्ष करता है।
यूनाइटेड टीचर्स फोरम के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग का आकलन शिक्षकों की मौत का मजाक है। सरकार को चाहिए वह इस पर पुनर्विचार करे और अनुग्रह राशि देने के लिए मानकों में संशोधन करे। उन्होंने कहा कि सिर्फ बरेली में 31 शिक्षकों की मौत हुई है।