तीन सौ बेड अस्पताल में पहुंची सोलर पैनल
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बरेली के 300 बेड अस्पताल में बिजली आपूर्ति की समस्या से जल्द निजात मिलेगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (नेडा) ने रीन्यूवल एनर्जी सर्विस कंपनी (रेस्को) मॉडल के तहत सौर ऊर्जा उपकरण स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है।
तीन सौ बेड अस्पताल में आए दिन बिजली कटौती से सीटी स्कैन और पैथोलॉजी जांच के लिए आने वाले मरीज परेशान होते थे। घंटों इंतजार के बावजूद कई बार वापस लौटना पड़ता था। मामले को अमर उजाला ने क्रमवार प्रमुखता से प्रकाशित किया तो उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लेकर जनरेटर दुरुस्त कराने के लिए पत्राचार किया। पर अस्पताल का अपना कोई बजट न होने से स्थिति जस की तस रही।
बीते दिनों शासन ने रेस्को मॉडल के तहत सौर ऊर्जा से अस्पताल में बिजली संकट दूर कराने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग ने नेडा को पत्र भेजा। नेडा की ओर से साइट इंजीनियर को मौके पर भेजकर पूरे अस्पताल को जगमग कराने समेत जीवन रक्षक उपकरणों के संचालन के लिए बिजली की जरूरत का आकलन कराया। तीन मेगावाट बिजली खपत की रिपोर्ट पर छत पर 450 सोलर प्लेट लगाने के लिए स्थान चिह्नित कराए गए।
450 सोलर प्लेट पहुंचीं
बुधवार को 450 सोलर प्लेट (पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल) अस्पताल पहुंच गईं। साइट इंजीनियर उमेश के मुताबिक सोलर इंवर्टर आने के बाद माउंटिंग स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। ऑफ ग्रिड के लिए बैटरी और अन्य उपकरणों में बैलेंस ऑफ सिस्टम (जंक्शन बॉक्स, केबल और वायरिंग, अर्थिंग और लाइटनिंग अरेस्टर, नेट मीटर) लगाए जाएंगे। इसमें करीब माह भर का वक्त लग सकता है। रेस्को मॉडल के तहत सारा खर्च फर्म करती है। साथ ही, करीब 25 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी फर्म की होती है।