बरेली। देशभक्ति से ओतप्रोत माहौल में आईएमए की ओर से रविवार को पुलवामा के 11 शहीदों के परिवार वालों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर उन्हें अंगवस्त्र के साथ साढ़े तीन लाख के चेक देकर नवाजा गया। ऑकवुड लॉन में आयोजित इस कार्यक्रम में आईटीबीपी के हिमवीर बैंड ने देशभक्ति आधारित गीतों की धुन बजाकर शहीदों के परिवार वालों का इस्तकबाल किया।
आईएमए की ओर से ‘शौर्य गाथा युद्ध की’ आयोजन में पुलवामा के 12 शहीदों के परिजनों को बुलाया था, जिसमें 11 के परिजन यहां पहुंचे। सैकड़ों शहरवासियों ने तालियां बजाकर उन्हें सलाम किया। शामली के शहीद अमित के पिता सोहनलाल, चंदौली के शहीद अवधेश के भाई बृजेश यादव, वाराणसी के शहीद रमेश यादव के पिता श्याम यादव, महाराजगंज के शहीद पंकज त्रिपाठी के पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी, उन्नाव के शहीद अजीत कुमार के पिता प्यारेलाल परिवार के साथ, मैनपुरी जिले के शहीद रामवकील की पत्नी गीता देवी, आगरा जिले के शहीद कौशल कुमार रावत की पत्नी ममता रावत, कन्नौज के प्रदीप सिंह के पिता अमर सिंह, शामली जिले के शहीद प्रदीप कुमार के पिता जगदीश, प्रयागराज के शहीद महेश कुमार के पिता राज कुमार, कानपुर जिले के शहीद श्याम बाबू के पिता राम प्रसाद इनमें शामिल थे। आईएमए की ओर से शहीदों के परिवार को डेढ़ लाख और उनकी पत्नियों दो-दो लाख का चेक दिया गया। पंजाबी महासभा ने इन परिवारों के रहने-खाने की जिम्मेदारी उठाई।
आईटीबीपी के डीआईजी ने पूछा- हाउज द जोश
‘हाउज द जोश’ के उद्घोष के साथ मंच पर आईटीबीपी बुखारा कैंप के डीआईजी एपीएस निम्बाडिया पहुंचे। उन्होंने पुलवामा की घटना पर सरकार के रुख को सराहा और छोटे से कदम का दूरगामी प्रभाव होने की बात कही। कहा, पाकिस्तान भारत को परमाणु हथियार के प्रयोग की धमकी देता था, लेकिन एयर स्ट्राइक ने भारत की हिम्मत को बढ़ाने का काम किया है। रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. के शव अग्रवाल ने कॉलेज के किसी भी कोर्स में एडमिशन लेने पर सेना, अर्द्धसैनिक बल के शहीदों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया। डॉ. विनोद पागरानी ने सभी को मतदान का संकल्प दिलाया। डॉ. विमल भारद्वाज और डॉ. शशांक भी मौजूद रहे।
सरकार क्यों नहीं देती शहीद का दर्जा
बरेली। देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर किसी का बेटा, भाई और पिता जा रहा था। पुलवामा हमले में सभी का सहारा, उम्मीद और गौरव खाक हो गया। फिर भी सरकार से उन्हें ‘शहीद’ का दर्जा क्यों नहीं मिला। पुलवामा शहीदों के परिजनों में यह कसक दिखाई दी।
कानपुर देहात से आए शहीद सिपाही श्याम बाबू के पिता राम प्रसाद ने सेना और अर्द्धसैनिक बल के बीच इस अंतर पर आक्रोश जताया। कहा, शहादत सबकी हो रही है तो अलग व्यवहार क्यों। शामली जिले के शहीद प्रदीप कुमार के पिता जगदीश ने देश में आतंकी हमलों पर गुस्सा जताया। कहा, सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा बनी रहे। कन्नौज के कांस्टेबल प्रदीप सिंह के पिता अमर सिंह ने भी शहादत को सलाम करने के बजाय सरकार से शहीद का दर्जा दिलाने की मांग की।
हेल्पलाइन नंबर जारी हो
शहीदों के परिजनों ने हेल्पलाइन जारी करने की मांग की है। मैनपुरी जिले के शहीद रामवकील की पत्नी गीता देवी ने कहा कि आश्रितों को जानकारी नहीं है कि उन्हें क्या सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए हेल्पलाइन होनी चाहिए।
‘हमीं बोला करें अमन की बोली दिल्ली से, यारों कभी तुम लोग भी लाहौर से बोलो’
बरेली। रात करीब आठ बजे शायरों और कवियों ने मंच संभाला। शहीदों के पराक्रम को सलाम करते हुए कवियों ने माहौल को गर्म कर की दिया। श्रोताओं ने तालियों की गूंज से शहीदों को नमन किया।
फिल्मफेयर अवॉर्ड और यश भारती से सम्मानित गीतकार संतोष आनंद ने सुनाया.. ‘नजारे नजर से ये कहने लगे, नयन से बड़ी चीज कोई नहीं, तभी मेरे दिल ने आवाज दी, वतन से बड़ी चीज कोई नहीं’, जब आग धधक ती है तब इंसान भड़कता है, हर जवां सीने में हिंदुस्तान धड़कता है’, ‘...मेरा रंग दे बसंती चोला कश्मीर के लिए’ भी सुनाया। इससे पहले शायर राहत इंदौरी ने कहा- मोहब्बत की इस मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं’, ‘जो तौर है दुनिया का उस तौर से बोलो, बहरों का इलाका है जरा जोर से बोलो, हमीं बोला करें अमन की बोली दिल्ली से यारों कभी तुम लोग भी लाहौर से बोलोे। डॉ. कविता अरोड़ा ने सरस्वती वंदन किया। निशा मुनि गौड़ ने सुनाया.. सीमा पर दुश्मनों का चीर कर कलेजा देश का गौरव बढ़ाया है’, ‘आतंकवाद का पिंडदान क्यों नहीं करते’। हास्य कवि शंभू शिखर ने ‘तुम तोड़ो वादा हम निभाते रहेंगे, जब तक 15 लाख खाते में न आ जाएंगे, मोदी जी हम तुम्हें जिताते रहेंगे’ सुनाकर माहौल को ठहाकों से भर दिया। आशीष अनल ने सुनाया- कल बदला तो आज बदलेगा, वक्त अपना मिजाज बदलेगा’। सिया सचदेव, निहारिका भारद्वाज ने भी रचनाएं सुनाईं।