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साहित्य भूषण से सम्मानित डॉ. महाश्वेता का निधन

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साहित्य भूषण से सम्मानित डॉ. महाश्वेता का निधन - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। साहित्यकार एवं आरपी डिग्री कॉलेज मीरगंज में हिंदी की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी (68) का मंगलवार को निधन हो गया। वह 31 जनवरी से अस्वस्थ चल रही थीं। वर्ष 2015 में उन्हें साहित्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी का जन्म इटावा में हुआ था। इस समय वह श्यामगंज स्थित आंचल कॉलोनी में रहती थीं। उन्होंने दो महाकाव्य, दस खंडकाव्य, गीत, गजल संग्रह, उपन्यास, कहानियों आदि का सृजन किया। काव्य एवं कथा साहित्य की विभिन्न विधाओं में हिन्दी के साथ अंग्रेजी साहित्य में भी लेखन कार्य किया। अब तक हिन्दी में चार दर्जन एवं नौ पुस्तकें अंग्रेजी में प्रकाशित हो चुकी हैं। आप साहित्य अकादमी दिल्ली, हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज, नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी समेत कई संस्थाओं एवं समितियों से संबद्ध रही हैं। आपकी अंग्रेजी कविताओं का लैटिन, फ्रेंच, ग्रीक, स्पेनिश, जापानी समेत अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। चारों वेदों से चुने हुए सौ-सौ मंत्रों का अनुवाद ‘वेदायन’ नाम से प्रकाशित हुआ एवं संपूर्ण यजुर्वेद का काव्य अनुवाद भी आपने किया है। महाश्वेता जी की कुछ पुस्तकों के विवेचनात्मक अध्ययन सहित उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर शोध कार्य भी हो चुके हैं। उनके निर्देशन में भी लगभग दो दर्जन शोधार्थी पीएचडी भी कर चुके हैं।
डॉ. महाश्वेता ने चीन, कजाकिस्तान, सिओल, इंग्लैंड, मैनचेस्टर, लंदन, पेरिस, एम्सटर्डम, हालैंड आदि में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों में भी सहभागिता की है। निधन की सूचना पर पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। कवि रोहित राकेश, शिक्षक नितिन सेठी, विजय मूलचंदानी आदि ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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