बरेली। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के बड़े प्रोजेक्ट लंबे वक्त से रेंग रहे हैं। सीतापुर फोरलेन के सुधार का काम कब तक शुरू होगा, इसका भी कोई अता-पता नहीं है। बरेली-मथुरा रोड अप्रैल में ही एनएचएआई को दिया जा चुका है, लेकिन इस हाईवे के चौड़ीकरण के काम पर अब तक ब्रेक लगा हुआ है। जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को जो रिकार्ड दिए गए थे, उसमें खामियां निकलने से यह प्रोजेक्ट भी लटका हुआ है। इधर बरेली-पीलीभीत होते हुए उत्तराखंड को जोड़ने वाले हाईवे को भी फोरलेन में तब्दील होना है, जबकि अभी इसका टू-लेन का काम ही ‘ओके’ नहीं हो रहा। जबकि आगे लोकसभा चुनाव है। पूरी सरकारी मशीनरी लंबे वक्त तक चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहेगी। ऐसे में इन कामों के शुरू होने में और भी ज्यादा देरी हो सकती है। इसका खामियाजा आखिरकार पब्लिक को ही झेलना पड़ेगा।
बरेली-सीतापुर हाईवे
कब शुरू होगा बरेली-सीतापुर फोरलेन को सुधारने का काम
- करीब डेढ़ सौ किलोमीटर लंबे बरेली-सीतापुर फोरलेन का आधा-अधूरा काम सालभर से लटका हुआ है। इसका कांट्रेक्ट लेने वाली इरा इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की कंपनी को भागे करीब छह माह का वक्त बीत चुका है, लेकिन 2700 करोड़ से पास हुए इस प्रोजेक्ट के शुरू होने की उम्मीद अब तक नहीं दिखाई दे रही। ऐसे में यह पूरा रोड खराब पड़ा है। बारिश में फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी सहित कई जगहों पर हाईवे टूटने और गड्ढे होने से बर्बाद हो गया है। अधूरे रेलवे ओवरब्रिज और फ्लाईओवर का काम भी शुरू नहीं होने से लखनऊ-दिल्ली को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे पर आए दिन जाम लगता है। बताते हैं कि एनएचएआई के अफसर इसका दोबारा कांट्रेक्ट देेने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कोई ठेकेदार इसके लिए सामने ही नहीं आ रहा है। ऐसे में अब तक इसकी टेंडर प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो सकी है।
बरेली-खटीमा हाईवे
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत पीलीभीत फोरलेन के काम में भी देरी
चीन बार्डर को छूने वाले धरचूला (पिथौरागढ़) तक फोरलेन का काम होना है। इसके तहत बरेली से पीलीभीत होते हुए खटीमा तक रोड चौड़ीकरण का प्रोजेक्ट भारतमाला योजना के तहत मंजूर है, लेकिन दिक्कत यह है कि इस रोड को टू-लेन बनाने के लिए जिस कंपनी ने वर्ष 2014 में 2.79 अरब से कांट्रेक्ट लिया था, वह अब तक काम पूरा नहीं कर सकी है। पीलीभीत के पास कुछ हिस्सा अभी भी बनना बाकी है। ऐसे में इस फोरलेन के काम में भी लगातार देरी हो रही है। हालांकि एनएचएआई के अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण के लिए गांवों की लिस्ट जिला प्रशासन को दे दी है, लेकिन यह काम अभी काफी धीमा है।
बरेली-मथुरा हाईवे
बरेली से बदायूं होते हुए मथुरा तक रोड पहले पीडब्ल्यूडी के पास थी, लेकिन अप्रैल में केंद्र सरकार ने इसे नेशनल हाईवे घोषित कर एनएचएआई को सौंप दिया। इसके बाद इस रोड का करीब 17 मीटर तक चौड़ीकरण और सुधारीकरण का काम एनएचएआई के आगरा मुख्यालय को कराना है, इसमें अब तक भूमि अधिग्रहण का काम ही जोर नहीं पकड़ पाया। हालांकि कुछ समय पहले एनएचएआई ने विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी को बदायूं जिले के 46 गांवों के जमीन के रिकार्ड दिए थे, लेकिन गाटा संख्या गलत निकलने से अधिग्रहण का काम फिर फंस गया।
सीतापुर फोरलेन का काम मार्च में शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा पीलीभीत हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए भी जमीन अधिग्रहण के लिए भूमि का ब्योरा प्रशासन को दिया जा चुका है। - आकांक्ष, डिप्टी जीएम, एनएचएआई