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बरेली कॉलेज के शिक्षकों ने एडमिशन करने से कर दिया इंकार

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बरेली कॉलेज में शिक्षकों ने एडमिशन कराने से कर दिया इंकार
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-शिक्षक बोले, नौ जुलाई तक ग्रीष्मकालीन अवकाश, उसके बाद करेंगे प्रवेश
-प्राचार्य बोले, एडमिशन को लेकर कुलपति से करेंगे वार्ता
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बरेली कॉलेज में शिक्षकों ने एडमिशन कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। एडमिशन को लेकर गुरुवार को हुई बैठक में शिक्षकों ने स्पष्ट कह दिया कि नौ जुलाई तक ग्रीष्मकालीन अकवाश हैं। उसके बाद ही शिक्षक एडमिशन प्रक्रिया में शामिल होगा। शिक्षकों के इस निर्णय से बरेली कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया अधर में लटक सकती है। हालांकि प्राचार्य ने कहा कि 23 जून से प्रवेश लिए जाएंगे। मामले को लेकर कुलपति से वार्ता की जाएगी।
दरअसल कॉलेज में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। नौ जुलाई को कॉलेज खुलेगा। इन दिनों बरेली कॉलेज के ज्यादातर शिक्षक छुट्टियों पर हैं। शिक्षक संघ ने पहले ही प्राचार्य को पत्र दे दिया था कि एडमिशन के लिए कम से कम सात से आठ बोर्ड बनेंगे जिसके लिए करीब 70 शिक्षकों की जरूरत होगी। ग्रीष्मकालीन अवकाश होने से शिक्षक नौ जुलाई से पहले एडमिशन प्रक्रिया में शामिल नहीं होगा। प्राचार्य ने सभी विभागों को पत्र जारी किया और गुरुवार को बैठक बुलाई। शिक्षक संघ ने एडमिशन कराने से साफ मना कर दिया। कहा कि अवकाश खत्म होने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होंगे।
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वर्जन
शिक्षकों ने अपनी बात रखी है। बात सही है कि इन दिनों अवकाश चल रहे हैं। हालांकि एडमिशन तो हर हाल में कराए जाएंगे। मामले को लेकर कुलपति से वार्ता करेंगे। 23 जून से एडमिशन होंगे।
-डॉ. अजय कुमार शर्मा, प्राचार्य बरेली कॉलेज

अवकाश के दिनों में कोई भी विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं करता। शिक्षक इन दिनों अवकाश पर हैं इसलिए नौ जुलाई से पहले एडमिशन प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते। प्राचार्य को पहले ही इस बात से अवगत करा दिया था। एडमिशन बोर्ड के लिए कम से कम 70 शिक्षक चाहिए। ज्यादातर शिक्षक बाहर गए हैं। ऐसे में एडमिशन कौन करेगा।
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-डॉ. वीपी सिंह, महामंत्री बरेली कॉलेज शिक्षक संघ

बरेली कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया पर संकट
बरेली कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया कुछ दिन के लिए अधर में लटक सकती है। गुरुवार को शिक्षक संघ ने प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग करने से साफ मना कर दिया। दूसरी तरफ अस्थायी कर्मचारियों ने भी आंदोलन शुरू कर दिया। बरेली कॉलेज में 15 हजार से ज्यादा प्रवेश होने हैं। ऐसे में शिक्षक और कर्मचारियों का असहयोग करना प्रवेश प्रक्रिया पर भारी पड़ सकता है।
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