सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से लैस होगा जिला अस्पताल
कोलकाता के एमआरआई हॉस्पिटल की तर्ज पर होंगे आपदा प्रबंधन
रिस्क असेसमेंट के तहत तीन ब्लॉकों का सर्वे पूरा
सभी ब्लॉकों का सर्वे होने के बाद तय होगा बजट
अमर उजाला ब्यूरो।
बरेली। आपदा को रोकना किसी के वश में नहीं होता लेकिन उचित प्रबंधन से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसी भी आपदा के दौरान जिला अस्पताल में मरीजों को राहत और उनके जान माल की सुरक्षा के लिए सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की कवायद शुरू हो गई है। पिछले दिनों हुई मीटिंग में सीएमएस ने एक्शन प्लान ओके कर दिया। संभावना है कि 15 अगस्त तक एक्शन प्लान लागू हो जाएगा।
करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले बने जिला अस्पताल का भवन लगभग जर्जर हो चुका है। ऐसे में आपदा के दौरान मरीजों और तीमारदारों की जान जोखिम में पड़ने की आशंका है। लिहाजा उनकी जान की हिफाजत के लिए यह योजना बनाई गई है। अधिकारियों की मानें तो कोलकाता के एक हॉस्पिटल के बाद बरेली जिला अस्पताल दूसरा हॉस्पिटल होगा जहां सेफ्टी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट पूरी तरह प्रभावी होगा। योजना के अनुसार समूचा चिकित्सालय फायर सेफ्टी जोन में तब्दील होगा। आईसीयू वार्ड को प्राथमिक स्तर पर सेफ्टी जोन में तब्दील करने की कवायद होगी। स्टेटिक चार्ज यानी अर्थिंग सीधे जमीन में उतर जाएगी, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका नहीं रहेगी।
इंसेट
कर्मचारियों का होगा प्रशिक्षण
रिस्क मैनेजमेंट प्लान के तहत हॉस्पिटल स्टाफ को रिस्क मैनेजमेंट प्लान के गुर सिखाए जाएंगे। फायर फाइटिंग, इमरजेंसी स्क्वाड और रेस्क्यू मैनेजमेंट समेत तीन टीमें बनेंगी। इन्हें आपदा के विविध पहलुओं से रूबरू कराते हुए बेहतर बचाव के तरीके सिखाए जाएंगे। आईसीयू के लाइफ सपोर्ट से मरीज को सुरक्षित बाहर निकालने के तरीके सिखाए जाएंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव संभव
चिकित्सालय का भवन काफी पुराना है, ऐसे में आपदा प्रबंधन की व्यवस्था के दौरान यदि कोई भवन या उसका कोई हिस्सा रोड़ा बनता दिखेगा तो उस भवन के इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव किए जाने की भी संभावना है। आग की संभावित घटना के दौरान प्रत्येक भवन तक फायर ब्रिगेड पहुंच सके इसके लिए रास्तों की व्यवस्था कराई जाएगी।
इस तरह बनाई गई योजना
जानकारी देते हुए सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि पिछले दिनों फायर एनओसी के लिए चिकित्सालय ने सीएफओ को आवेदन किया था। इसके बाद अस्पताल के निरीक्षण के दौरान आपदा प्रबंधन को लागू कराने की योजना बनाई गई। जो इंस्टीटयूट ऑफ ईएचएस स्टडीज के चेयरमैन एसके सूरी के निर्देशन में और सहायक के तौर पर जिला चिकित्सालय मैनेजर पूजा को जिम्मा सौंपा है।
तीन ब्लॉक का हुआ सर्वे
जिला चिकित्सालय में सात ब्लॉक हैं। रिस्क असेसमेंट के तहत तीन ब्लॉक प्रशासनिक भवन, चाइल्ड वार्ड और ओपीडी का सर्वे पूरा हो चुका है। अन्य चार ब्लॉकों का भी जल्द सर्वे पूरा होने के बाद आपदा प्रबंधन सिस्टम से हॉस्पिटल को लैस करने का बजट तैयार होगा।
वर्जन
मरीजों को सुविधा और सुरक्षा मुहैया कराना हमारा फर्ज है। जिसेे देखते हुए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान का खाका तैयार करा रहे हैं। संभावना है कि अगस्त माह तक हॉस्पिटल में यह प्लान लागू हो जाएगा। - डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस
आपदा या दुर्घटना कब हो जाए इसका कोई भरोसा नहीं। हॉस्पिटल सेंसिटिव जोन है। बरेली का जिला अस्पताल देश का दूसरा हॉस्पिटल होगा जहां सेफ्टी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान लागू होगा। - एसके सूरी, चेयरमैन, इंस्टीट्यूट ईएचएस स्टडीज