मिशन एडमीशन खबर का जोड़ ----
माननीय जब स्कूलों के साथ तो कौन सुने पैरेंट्स की बात
- डीएम ने कहा- शासनादेश में कमिश्नर को दिए गए निर्देश, मंडलायुक्त से बात कर करेंगे कार्रवाई
बरेली। राज्य सरकार ने भले ही प्राइवेट स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारण अध्यादेश जारी कर दिया है, लेकिन सरकार के माननीय पूरी तरह प्राइवेट स्कूलों के साथ हैं, इसलिए पैरेंट्स की बात कहीं सुनी नहीं जा रही। अफसर कभी अध्यादेश न मिलने तो कभी अन्य बहाने से पैरेंट्स की शिकायतों का समाधान नहीं कर रहे। न ही अब तक पैरेंट्स का शोषण करने वाले स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई अब तक हुई है।
पहली अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। ज्यादातर प्राइवेट स्कूल पैरेेंट्स से अगले सत्र के लिए किताबें, बैग, पानी की बोतल, ड्रेस खरीदवा चुके हैं। तमाम पैरेट्स राज्य सरकार के निर्देश के विपरीत 20 हजार से दो या तीन गुनी ज्यादा फीस भी जमा कर चुके हैं। प्राइवेट स्कूल जनप्रतिनिधियों से मिलकर कार्रवाई न करने का दबाव बना चुके हैं। अफसर भी माननीयों का इशारा पाकर कान्वेंट स्कूलों पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। अब तक सरकार से प्राइवेट स्कूलों पर शुल्क निर्धारण अध्यादेश जारी न होने की बात प्रशासन की ओर से कही जा रही थी, लेकिन बृहस्पतिवार को नए अध्यादेश पर शासनादेश भी आ गया। फिर भी प्रशासन की ओर से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर कोई एक्शन लेने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले।
यहां तक कि पैरेंट्स की आठ या 10 शिकायतें मिलने की बात प्रशासन ने 20 दिन पहले ही मानी थी और उस पर कान्वेंट स्कूलों की जांच कराकर कार्रवाई करने की बात भी कही गई थी, लेकिन बाद में फीस निर्धारण पर नया कानून बनने की बात कहकर पैरेंट्स की शिकायतें पेंडिंग में डाल दी गईं। फिलहाल, किसी भी पैरेंट्स की शिकायत पर कोई जांच नहीं हुई। इससे प्राइवेट स्कूल प्रबंधन के हौसले पूरी तरह बुलंद हैं। वह सरकार के अध्यादेश को ठेंगा दिखाकर पैरेंट्स से मनमानी फीस वसूलने में किसी तरह का संकोच नहीं कर रहे।
मंडलायुक्त से निर्देश मिलने पर होगी कार्रवाई
राज्य सरकार द्वारा राज्यपाल के हस्ताक्षर से जारी प्राइवेट स्कूलों की फीस निर्धारण अध्यादेश जारी होने के बाद जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इंटरनेट पर अध्यादेश आ चुका है। वह उसका अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्यादेश में स्कूलों की फीस निर्धारण के संबंध में कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की बात कही गई है। जिलाधिकारी को सीधे कोई निर्देश नहीं हैं। मंडलायुक्त के निर्देश मिलने का इंतजार है। वह इस संबंध में जल्द ही कमिश्नर से बात कर अध्यादेश को लागू कराएंगे।