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निर्माण पूरा होने वाले मकानों पर नहीं लगेगा जीएसटी

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बरेली।
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एक जुलाई से देशभर में लागू होने जा रहे गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एकीकृत प्रणाली पर क्रेडाई के सेमिनार में गंभीर मंथन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जीएसटी लागू होने से रियल स्टेट कारोबार को जहां कई फायदे होंगे, वहीं कुछ जटिलताओं से भी गुजरना होगा। अब करदाताओं को हर माह अपनी बैलेंस सीट मेनटेन करनी होगी। पुराने टैक्स बकाया को आगे नहीं एडजेस्ट नहीं किया जा सकेगा।
मुख्य वक्ता सीए कपिल वैश्य ने बताया कि निर्माणाधीन इमारतों पर जीएसटी का वास्तविक टैक्स रेट 18 प्रतिशत है। इसमें से लैंड का हिस्सा 33 प्रतिशत मानते हुए जीएसटी में इसे 12 प्रतिशत किया गया है। 30 जून तक जो एमाउंट बचेगी, उस पर 4.5 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगेगा। इसके बाद 12 प्रतिशत सर्विस टैक्स देना होगा। कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद डेवलपर्स की एकाउंट प्रक्रिया बहुत जटिल हो जाएगी। प्रत्येक डेवलपर्स को हर माह अपनी बैलेंस सीट बनानी होगी। जिन मकानों या फ्लैट का निर्माण पूरा हो चुका है, उन पर जीएसटी नहीं लगेगा। डेवलपर्स अगर चाहे तो ग्राहकों द्वारा पेमेंट न करने के बाद भी पूरे निर्मित मकानों पर आज की दरों से टैक्स चुका सकते हैं।
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सीए मोहित वैश्य ने बताया कि डेवलपर्स ये मानकर चलें कि जीएसटी लागू होने के बाद हर चीज पर प्रत्येक माह टैक्स देना है। साल के आखिर में ये संभव नहीं होगा कि पुराना टैक्स मैनेज कर लें। मासिक बैलेंस सीट बनाते रहिए। इससे फाइनेंशियल परिणामों में सुधार दिखाई देगा। डेवपलर्स को अब राज्य और केंद्र के अलग-अलग
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टैक्स चुकाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
क्रेडाई अध्यक्ष रमनदीन सिंह ने बताया कि जीएसटी काउंसिल अभी एक सप्ताह में अन्य बदलाव भी करेगी। इस पर नजर रखने की जरूरत है। बिल्डर सुनील गुप्ता, धर्मेंद्र गुप्ता, प्रिंस आदि का कहना था कि अगले सात दिन में क्या नए नियम आते हैं। रियल स्टेट पर इसका असर देखना होगा। सेमिनार में विपिन अग्रवाल, राजू खंडेलवाल, अंकित जौहरी, आकाश वार्ष्णेंय, राजू अरोरा, आशीष गुप्ता, शंकर अग्रवाल आदि बिल्डर मौजूद थे।
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