अपने पति रामकुमार के इलाज के लिए भीख मांग रही पीलीभीत की शकुंतला की कहानी पढ़ कर पसीजे प्रख्यात शायर और विधान परिषद सदस्य वसीम बरेलवी ने विधायक निधि देने के लिे सारी लिखा पढ़ी की, इलाज शुरू हो गया। खुशलोक अस्पताल के डॉ. विनोद पागरानी ने न्यूरो रोग विशेषज्ञ व सर्जन की टीम बुलाकर उसके सिर का इलाज कराया। इसके अलावा बेड सोर को भी ठीक किया। अब रामकुमार पूरी तरह ठीक है लेकिन शकुंतला उसे लेकर घर नहीं जा पा रही है। विधायक वसीम बरेलवी द्वारा दी गई विधायक निधि नियमों के फेर में फंस गई है। सीडीओ पीलीभीत ने उस पर यह कहते हुए अड़ंगा लगा दिया है कि जिस अस्पताल में मरीज का इलाज हुआ है वह आरबीएवाई योजना से अनुबंधित होना चाहिए। अब अस्पताल का पैसा न मिलने से महिला भी घर नहीं जा पा रही है। महिला कमिश्नर से लेकर डीएम पीलीभीत तक से मिल आई है। इधर वसीम साहब प्रदेश के वित्त मंत्री से गुहार कर रहे हैं कि किसी तरह पैसा रिलीज कराइए लेकिन अब तक बात नहीं बनी।
एक माह पहले कहासुनी में पड़ोसी ने रामकुमार के ऊपर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था। रामकुमार को लेकर बरेली के रामकिशोर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां एक माह से भर्ती रामकुमार के इलाज में 60 हजार रुपए से ज्यादा पैसे खर्च हो चुके थे, इसके अलावा करीब डेढ़ लाख रुपए का बिल बन गया ठेले पर सब्जी बेचने वाले रामकुमार की पत्नी ने चंदा करके और रिश्तेदारों से मांग कर करीब 14 हजार रुपए दवा में खर्च किए हैं। आधा पैसा चुकाया नहीं गया। डॉ. विनोद पागरानी के यहां महिला के पति को भर्ती कर लिया लेकिन यहां भी पैसे की कमी आड़े आ गई। अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो मदद को लोग जुटे लेकिन न्यूरो से जुड़े आपरेशन के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत थी। विधायक वसीम बरेलवी ने अमर उजाला की खबर पढ़कर मदद को हाथ बढ़ाया, निधि से डेढ़ लाख रुपये की धनराशि चेक से जारी कर दिया। बरेली से इसे पीलीभीत सीडीओ के ध्यानार्थ भेजा गया। वहां से पैसा तीन माह बाद भी जारी नहीं किया गया है। अस्पताल ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आधे से अधिक पैसा महिला का माफ कर दिया है लेकिन जो पैसा दवा और बाहरी डॉक्टरों को दिया जाना है उस पर भी तक अड़ंगा लगा हुआ है।
चार छोटे बच्चाें के साथ झोपड़ी में रहता है रामकुमार
रामकुमार के चार छोटे बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी दस साल की है। सांस और देवर साथ रहते हैं लेकिन वे भी मजदूरी करते हैं। जमीन नहीं है, सब्जी का ठेला लगाकर 30 रुपए प्रतिदिन किराए पर लेकर चलाते हैं। गांव के लोगों ने मदद की तो 5 हजार रुपए हो पाए। इसे अस्पताल में जमा कराया है।
कोट
तीन माह से मरीज भर्ती है और वह पूरी तरह ठीक हो चुका है। इलाज का कुल खर्च करीब साढ़े 3 लाख रुपये बना है। विधायक निधि से पैसे देने की बात कही थी लेकिन नियमों की वजह से वह हमें मिल नहीं सकता। अब मरीज भी घर जाने को तैयार है। बाहरी डॉक्टर बुलाए गए थे और दवाआें के भी पैसे दिए जाने हैं।
डॉ. विनोद पागरानी, संचालक, खुशलोक अस्पताल
कोट
मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है कि धनराशि गरीब महिला को मिल जाए लेकिन पीलीभीत में कहीं नियमाें की वजह से मामला फंस गया है। मैंने वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया है। लखनऊ तक बात कर ली है। मुझसे जो होगा मैं करूंगा।
वसीम बरेलवी, एमएलसी
कोट
डॉ. वसीम बरेलवी की विधायक निधि से मरीज को इलाज के लिए पैसा अगर नहीं मिल रहा है तो इसमें नियमों का कुछ पेंच फंसा है। इसमें सीडीओ पीलीभीत बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
राजेश अग्रवाल, वित्त मंत्री