देवबंद के उप चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे देवबंदी मसलक को माना जा रहा है। इस नजरिये को लेकर अब लोगों का ध्यान बरेलवी मसलक की ओर है कि 2017 के चुनाव में बरेलवियों का रुख क्या रहेगा। फिलहाल इस मुद्दे पर दरगाह आला हजरत खामोश है। यहां के लोग अभी किसी के पक्ष विपक्ष की बात नहीं करना चाहते, बल्कि कुछ लोग तो फिलहाल किसी सियासी मामले से खुद को दूर ही रखना चाहते हैं।
दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन जमात रजा मुस्तफा ने भी किसी पार्टी के पक्ष में अपना रुख जाहिर तो नहीं किया है। अलबत्ता जमात के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने कहा है कि देवबंद चुनाव के नतीजे को उत्तर प्रदेश के आइने के तौर पर न देखा जाए। देवबंद मसलक के लोग पहले से ही कांग्रेस के समर्थक रहे हैं। इस लिए देवबंद विधान सभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार का जीतना कोई अचंभे की बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोक सभा चुनाव में देवबंद विचारधारा के संगठन हमेशा कांग्रेस को समर्थन का एलान करते रहे हैं। इसके बदले में कांग्रेस पार्टी ने उनको केंद्रीय हुकूमत में बड़े-बड़े पदों पर बिठाया और कई लोगों को राज्य सभा भी भेजा। जहां तक सूफी बरेलवी मुसलमानों की बात है तो यह हमेशा सियासत से बहुत दूर रहे हैं। इसकी वजह से कुछ नुकसान भी उठाना पड़ा है। 2017 के विधान सभा चुनाव में अब रणनीति बनाएंगे। ताकि उत्तर प्रदेश की हुकूमत में हमारा भी अमल दखल बढ़ सके।