बरेली। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिन कंपनियों से दवा खरीदी जानी थी उनमें कई ने लापरवाही की और समय पर दवा की सप्लाई नहीं की। नियमानुसार 45 दिन के भीतर दवा सप्लाई न होने पर उस कंपनी पर पेनाल्टी लगाई जानी थी जो कि नहीं लगाई गई। अब शासन ने ऑडिट के लिए ऐसे सभी मामलों में रिपोर्ट तलब कर ली। पत्र आते ही स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। अब रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं कि कितनी दवा कंपनियों को ऑर्डर गए और कितनों ने समय से सप्लाई नहीं की।
दरअसल, मामला कुछ वर्ष पहले का है। शासन ने दवा खरीदने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी बना रखा है और कुछ कंपनियां तय कर रखी हैं। उन्हीं से ही दवा खरीदी जाती है। नियम है कि अगर मांग जाने के 45 दिन के भीतर दवा सप्लाई नहीं होती है तो विभाग ऐसी कंपनियों पर पेनाल्टी लगाएगा। अब शासन तक मामला पहुंचा है कि कुछ कंपनियों ने दवा समय पर सप्लाई नहीं की और उनपर पेनाल्टी भी नहीं लगाई गई। अब ऑडिट होना है तो उससे पहले शासन ने सारे रिकॉर्ड तलब कर लिए। कितनी कंपनियों के आर्डर गए और कितनों ने 45 दिन के भीतर सप्लाई नहीं की। अब विभाग पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहा है। सीएमओ डॉ. वीके शुक्ल का कहना है कि शासन से पत्र आया है। जो रिकॉर्ड मांगे गए हैं उनको दिखवाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लिया जायजा
बरेली। स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा शासन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की। सीएमओ डॉ. वीके शुक्ल ने विभाग की रिपोर्ट पेश की जिसमें पल्स पोलिया अभियान, आयुष्मान योजना समेत सभी योजनाओं की समीक्षा हुई। स्वास्थ्य विभाग की कुछ योजनाएं लंबित पड़ी उनको जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। सीएमओ के अनुसार ज्यादातर योजनाएं बेहतर संचालित हो रही हैं। जो लंबित हैं उनको भी जल्द पूरा करा लिया जाएगा।