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शक्ति की उपासना के लिए सजने लगा मां का दरबार

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kushmanda devi
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बरेली। कल (छह अप्रैल) से शुरू होने वाले नवरात्र के लिए मां के दरबार को सजाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में साफ-सफाई समेत रंगाई-पुताई का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रमुख मंदिर प्रशासन के अनुसार पहले दिन मां के दर्शन को काफी तादाद में भक्त उमड़ते हैं, इसलिए उन्हें सकुशल मां के दर्शन कराने के लिए पुजारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अभिजीत मुहूर्त में मां की स्थापना और आराधना परिवार के सभी सदस्य एकजुट होकर करें तो ये बेहद फलदायक रहेगा।
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कालीबाड़ी स्थित मां काली के मंदिर, बदायूं रोड स्थित चौरासी घंटा मंदिर, पीलीभीत बाईपास स्थित मां वैष्णो मनोकामना देवी मंदिर, सनसिटी विस्तार स्थित मां जानकी मंदिर, धोपा मंदिर स्थित देवी दरबार समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में गुरुवार को साफ-सफाई का दौर शुरू हो गया है। पुजारियों ने बताया कि नवरात्र के प्रत्येक दिन सुबह मां के दरबार को फूलों से सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला सुबह मां के शृंगार और महाआरती के बाद शुरू होगा। प्रत्येक दिन शाम को मंदिरों में महाआरती होगी। इसके बाद मंदिर प्रबंध समिति समेत स्थानीय महिला मंडली की ओर से मां के छंद और कीर्तन का कार्यक्रम होगा। साथ ही, मनोकामना पूरी होने वाले परिवारों की ओर से मंदिर परिसर में पूजन, हवन आदि संपन्न कराए जाएंगे।

पूजन की थाल
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि सुबह स्नान के बाद स्वच्छ मन के साथ मां की प्रतिमा को चौकी पर रखने के बाद वस्त्र आदि धारण कराएं। पूजन सामग्री में घी, कपूर, लौंग का जोड़ा, जायफल, नारियल, रोली, सिंदूर, पान का पत्ता, आम के पत्ते समेत अन्य परंपरानुसार सामग्री को रखें। फिर कलश स्थापना के लिए नारियल को पूजन वस्त्र से लपेटकर रखें। परिवार सामूहिक मां की आरती उतारें।
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कलश स्थापना का मुहूर्त
छह अप्रैल को घटस्थापना मुहूर्त का समय सुबह 6.10 बजे से 10.19 बजे तक रहेगा। प्रतिपदा तिथि पांच अप्रैल दोपहर 2.40 बजे से छह अप्रैल की दोपहर 3.23 बजे तक रहेगी। ज्योतिषशास्त्र में सूर्योदय का मान होने से छह अप्रैल को घटस्थापना छह अप्रैल को किए जाने का विधान है।
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अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम
- सात्विक जीवन धारण कर भूमि पर शयन करना
- उपवास अथवा सात्विक आहार ग्रहण करना
- सत्संग करते हुए ज्ञान सूत्र से जुड़ना चाहिए
- ध्यान करना और चमड़े का प्रयोग करने से बचें
- क्रोध से बचें और दो घंटे का मौन रखना चाहिए
- अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना कर विसर्जन करना
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