बरेली। इतिहास के वायवा में रविवार को छात्रों के बीच विस्तृत ज्ञान की कमी देखने को मिली। शिक्षकों के छोटे-छोटे सवालों का जवाब तो छात्र देते रहे, लेकिन जब डिटेल पूछी गई तो अटक गए। कई छात्र तो रुहेलखंड का इतिहास ही नहीं बता सके। ऐसे ही अंग्रेजी में कई छात्र शब्दों का सही उच्चारण भी नहीं कर सके।
रविवार को बरेली कॉलेज में एमए के उर्दू, अंग्रेजी एवं इतिहास विषयों का वायवा हुआ। मगर इसमें सबसे रोचक वायवा इतिहास का था। शिक्षकों ने छात्रों से दिल्ली सल्तनत की महिला सुल्तान के बारे में पूछा तो उन्होंने रजिया सुल्तान का नाम तो बता दिया गया, लेकिन जब समयकाल पूछा तो छात्र उलझ गए। अधिकांश छात्रों ने इसका गलत जवाब दिया। गांधी के आंदोलन और दांडी यात्रा के बारे में छात्रों ने सुगमता से बता दिया। मगर जब रुहेलखंड को लेकर बात हुई तो छात्र अटक गए। शिक्षकों का सवाल था, रुहेलखंड के सरदार कौन थे? छात्रों ने सरदार का नाम खान बहादुर खान बता दिया। इसके बाद शिक्षकों ने रुहेलखंड का इतिहास पूछा तो छात्र अटक गए। क्योंकि छात्रों को शिक्षकों से इस सवाल की उम्मीद नहीं थी। पूरे वायवा के दौरान प्राइवेट पढ़ाई करने वाले छात्रों की स्थिति ज्यादा खराब नजर आई।
अंग्रेजी के शब्दों का सही उच्चारण भी नहीं कर सके
बरेली कॉलेज में अंग्रेजी विभाग एसोसिएट प्रोफसर डॉ. चारू मेहरोत्रा ने बताया कि वायवा में प्राइवेट छात्र ज्यादा थे। मगर हम उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं रखते। मगर एमए के छात्र हैं तो इतनी उम्मीद तो होती है कि शब्दों का उच्चारण सही से करें लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। कुछ बच्चे तो लेखक वर्ड्सवर्थ, जार्ज एलियट, ब्राउनी आदि के नाम का उच्चारण भी ठीक से नहीं कर सके।