बरेली। रेलवे यात्रियों को ठगने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। दिल्ली पैसेंजर में स्लीपर में रिजर्वेशन तो धड़ल्ले से होते हैं, लेकिन यात्रियों को मिलता है साधारण कोच। ऐसे में टीटीई से अभद्रता और मारपीट करने की घटनाएं आम हो गई हैं। शिकायत के बाद भी रेलवे अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
जंक्शन से शाम सवा पांच बजे चंदौसी होते हुए दिल्ली जाने वाली दिल्ली पैसेंजर में दो आरक्षित कोच लगते हैं, लेकिन यात्रियों को एक भी स्लीपर कोच मिल जाए तो बहुत है। यह एक दिन नहीं रोजाना की बात है। स्लीपर की जगह साधारण कोच लगा दिया जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत चंदौसी और मुरादाबाद में होती है, जहां साधारण कोच से यात्रियों को हटाने के लिए एक घंटा ट्रेन खड़ी रहती है।
टीटीई जीआरपी/आरपीएफ और रेलवे कंट्रोल को मेसेज देते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। टीटीई भी यात्रियों से हटने के लिए कहते हैं तो मारपीट की नौबत आ जाती है। बुधवार को जंक्शन पर भी ऐसा ही हुआ। ट्रेन में यात्रियों को आरक्षित कोच नहीं मिला। पता चला कि आरक्षित की जगह साधारण कोच लगाया है, यात्री कोच में पहुंचे तो वहां पहले से यात्री बैठे हुए थे, जो उठने को तैयार नहीं हुए। कोच में टीटीई पहुंचे तो यात्री उनसे भी उलझ गए। किसी तरह से आरक्षित यात्रियों को कोच में बैठाया गया। सूत्रों का कहना है कि ट्रेन का मेंटीनेंस दिल्ली में होता है। जहां स्लीपर कोच काटकर दूसरी ट्रेन में लगा दिए जाते हैं, लेकिन जंक्शन पर कैरिज एंड वैगन स्टाफ को नहीं बताया जाता है। जंक्शन के सीआईटी अभय कुमार चौबे ने इस संबंध में स्पेशल रिपोर्ट बनाकर मुरादाबाद डिवीजन के एडीआरएम अश्विनी कुमार को भेजी है।