बरेली। माफिया अतीक अहमद के नाम पर धमकी देने वाला ऑडियो वायरल होने के बाद मंगलवार को जीएम जलकल वीएन द्विवेदी नगर निगम पहुंच गए। नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव और अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह ने करीब आधा घंटे तक बंद कमरे में उनसे पूछताछ की। जीएम ने बताया कि उन्हें बार-बार फोन करके उकसाया जा रहा था। रात करीब आठ बजे फोन किया तो वह नशे में थे। डीपी यादव का नाम लेकर गाजियाबाद से बेटे के अपहरण की धमकी दी गई तो मैंने भी रौब जमाने के लिए अतीक का नाम ले दिया। अतीक से मेरा कोई परिचय या लेना-देना नहीं है।
दो दिन पूर्व जलकल विभाग के जीएम वीएन द्विवेदी का ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें शिकायत वापस लेने के लिए वह कांट्रेक्टर पर माफिया अतीक अहमद और बाहुबली हरिशंकर तिवारी का नाम लेकर दबाव बना रहे हैं। मेयर ने इस मामले में नगर आयुक्त को जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए। सोमवार को बीमारी के चलते जीएम नगर निगम नहीं पहुंचे। मंगलवार दोपहर वह पहुंचे तो नगर आयुक्त ने तलब कर लिया और अपर नगर आयुक्त की मौजूदगी में करीब आधा घंटे तक जीएम से पूछताछ की गई। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद जीएम को नोटिस रिसीव कराकर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। जीएम ने नगर आयुक्त को बताया कि ऑडियो को छेड़छाड़ कर पेश किया गया है। यह पूरा नहीं है, इसमें अलग-अलग समय पर हुई बातचीत की तीन ऑडियो को काटकर जोड़ा गया है। बुधवार को वह अपना लिखित स्पष्टीकरण दे देंगे।
शासन तक मामला, विजिलेंस ने की पूछताछ
बताया जाता है कि यह मामला शासन तक पहुंच गया है। किसी ने ऑडियो को मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपलोड करके शिकायत की है, जिसके बाद डीजीपी कार्यालय को जांच दी गई। इसके चलते ही विजिलेंस में हड़कंप मचा है। मंगलवार को जीएम के नगर निगम में आने की सूचना मिली तो विजिलेंस टीम फिर से नगर निगम जा पहुंची। जीएम जलकल से उनके कार्यालय में ही टीम ने पूछताछ की।
टेंडर को लेकर विवाद, हो सकते हैं निरस्त
ऑडियो प्रकरण की जड़ नगर निगम में 67 ट्यूबवेल ऑटोमेशन के टेंडर हैं। यह टेंडर दस साल के लिए किए जाने हैं। प्रत्येक ट्यूबवेल के लिए हर महीने करीब 15 हजार रुपये खर्च किए जाने हैं। इस हिसाब से करीब दस करोड़ रुपये का यह काम है। पिछले दिनों जब यह टेंडर निकाले गए थे तो कांट्रेक्टर विवेक के आवेदन खारिज कर दिए गए और काम लखनऊ की फर्म को मिल गया। इसके बाद विवेक के नाम से मेयर उमेश गौतम से शिकायत की गई। मेयर ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से स्वयं या फिर विजिलेंस से जांच कराने को कहा। जांच हुई तो पाया गया कि शिकायतकर्ता ने ही आवेदन में फर्जी दस्तावेज लगाए थे। वहीं मेयर उमेश गौतम ने नगर आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि अगर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी है तो उन्हें निरस्त कर दिया जाए।
एफआईआर के नोटिस पर बिगड़ा मामला
जीएम जलकल ने बताया कि आठ जनवरी को शिकायतकर्ता फर्म को फर्जी दस्तावेज लगाने के चलते कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा गया था कि क्यों न उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। इसके बाद ही यह मामला शुरू हुआ और उन्हें फंसाने की साजिश शुरू हो गई। पहले उन्हें बेटे के अपहरण की धमकी दी गई और फिर डीपी यादव के नाम से उकसाया गया। जीएम बोले- मैं खाने-पीने का शौकीन हूं, इसके चलते नशे में अतीक अहमद का नाम ले दिया। मेरी न तो कभी अतीक से मुलाकात हुई है और न ही मुझ पर इलाहाबाद में कोई मुकदमा दर्ज हुआ। जो ऑडियो पेश किया गया है, उसमें तीन टुकड़े जोड़कर वायरल करने की नीयत से दूसरे पक्ष की धमकी हटा दी गई है। मैं इस मामले में विधिक राय लेकर कार्रवाई करूंगा।
जीएम जलकल काम पर लौट आए हैं। ऑडियो वायरल होने के संबंध में उनसे पूरी जानकारी लेकर नोटिस रिसीव करा दिया गया है। जीएम ने ऑडियो में छेड़छाड़ की बात कही है। दो दिन में वह लिखित रूप से अपना जवाब प्रस्तुत करेंगे, फिर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
- राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त