बरेली। रिठौरा अनाज घोटाले में पतली गर्दनें तो नप चुकी हैं। अब मोटी गर्दनों के लिए फंदे की तैयारी चल रही है। हालांकि इस घोटाले में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की एक साथ कई कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। अनाज घोटाले में वितरण की त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था में लगे भुता गोदाम प्रभारी और पूर्ति लिपिक को सस्पेंड कर दिया गया है। डीएम ने बीडीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। घोटाले की परतें उधड़ने के साथ ही इसमें शामिल अफसर और कर्मचारी भी बेनकाब होते जा रहे हैं। घोटाले में कई बड़े अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।
रिठौरा में 27 नवंबर को बरामद सरकारी अनाज के मामले की जांच मेें एक के बाद एक कर्मचारियों की लिप्तता सामने आ रही हैं। इस प्रकरण में सरकारी वितरण की त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था में भी तमाम गड़बड़ी सामने आई हैं। विवेचना करने वालों का कहना है कि एसएफसी गोदाम पर जब अनाज पहुंचता है तो आपूर्ति होने वाले अनाज की चेकिंग की जिम्मेदारी एक अधिकारी को सौंपी जाती है। भुता के एसएफसी गोदाम पर यह जिम्मा भुता बीडीओ/ डीआरडीए के पीडी वीरेंद्र कुमार पर था। त्रिस्तरीय जांच के पहले चरण में दायित्व सही से न निभाने पर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इन्हें कारण बताओ नोटिस दिया है। इसी तरह जांच के दूसरे चरण में अनाज के उठान को शामिल किया गया है। यानी जिस दिन कोटेदार गोदाम से अनाज ले जाता है तो उसकी चेकिंग के लिए भी एक कर्मचारी नियुक्त होता है। जांच में यह उजागर हुआ है कि दूसरे चरण की चेकिंग के लिए पूर्ति विभाग के लिपिक पवन कुमार को तैनात किया गया है। इन्होंने अपने काम में लापरवाही दिखाई और अनाज के सरकारी बोरों को मुहर लगाए बगैर ही उनका उठान करा दिया। इसकी वजह से रिठौरा में पकड़े गए अनाज के बोरे सरकारी हैं या नहीं, इसकी जांच बाधित हुई। डीएम ने इस पूरे मामले में भुता गोदाम प्रभारी सौमित्र पाल सिंह की भूमिका को संदिग्ध पाया है। लिहाजा उन्हें निलंबित करने के लिए एसएफसी के एमडी से संस्तुति की है। रिठौरा मामले में कार्रवाई शुरू होने से इसमें शामिल अधिकारी और कर्मचारियों की हालत पतली है।
अभी डीएम, कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई बाकी
इस मामले में पुलिस ने एक आढ़ती सहित पांच लोगों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली है लेकिन डीएम और कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्ति विभाग और मंडी के अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी अभी बाकी है। डीएम की तरफ से नामित एडीएम एफआर मनोज कुमार पांडेय को इस मामले की जांच रिपोर्ट डीएम को देनी है। विवेचक ने इसमें तमाम सबूत और संबंधित कर्मचारियों-अफसरों के बयान भी लिए हैं। उधर, कमिश्नर रणवीर प्रसाद भी डीडी मंडी और उपायुक्त खाद्य से मामले की जांच करा रहे हैं। इसकी रिपोर्ट भी तैयार हो रही है।
रिठौरा मामले में गोदाम प्रभारी, पूर्ति लिपिक पर कार्रवाई हो गई है। बीडीओ का भी पक्ष जाना गया है। इस प्रकरण में जैसे-जैसे दोषी अफसरों और कर्मचारियों के नाम सामने आ रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो रही हैं। एडीएम एफआर की जांच आख्या आनी अभी बाकी है। - वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी