फरीदपुर। एनएचएआई के अधिकारियों ने लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर आवागमन शुरू जरूर करवा दिया है, लेकिन राजमार्ग पर कदम-कदम पर हादसे का खतरा बना हुआ है। शनिवार को जिन गड्ढों को भरवाया गया था, बारिश के कारण रविवार को उनमें से अधिकतर स्थानों की मिट्टी बह गई। अंदर से खोखली हो चुकी सड़क पर भारी वाहनों के लिए खतरा ज्यादा है।
एनएएचआई के अधिकारियों ने मरम्मत के नाम पर अब तक महज खानापूर्ति ही की है। शनिवार को मिट्टी डलवा कर गुरुद्वारे के सामने बने ओवरब्रिज को सही करवाया था, लेकिन मिट्टी चौबीस घंटे भी नहीं टिकी और बारिश में बह कर पुल के नीचे चली गई। मिट्टी से भरे जो कट्टे रखवाए गए थे, वह भी एनएचएआई के अधिकारियों ने हटवा दिए। ऐसे में यदि रात में पुल पर एक वाहन दूसरे को ओवरटेक करता है तो हादसे का खतरा रहेगा। इसके अलावा फरीदपुर बाईपास पर जहां वन-वे किया गया है, वहां भी खतरा बरकरार है। यदि वन-वे पर दोनों तरफ से वाहन आएंगे तो एक छोर के वाहनों को सड़क के किनारे चलना पड़ेगा। ऐसे में गड्ढों में भरी गई मिट्टी के धंसने का खतरा होगा। भारी वाहनों का बोझ झेलना तो असंभव सा होगा, लिहाजा बड़ा हादसा भी हो सकता है।
प्रशासन की नहीं मानी बात
एसडीएम राकेश सिंह और सीओ एमपी अशोक ने बाईपास का निरीक्षण किया। उन्होंने एनएचएआई का काम देख रहे ठेकेदार से कहा कि राजमार्ग के किनारे टूट पड़े हैं। यहां वाहन किनारों पर जा सकते हैं, इसलिए रेत से भरे कट्टे सड़क के किनारे से कम से कम तीन फिट दूर रखे जाएं। ताकि वाहन किनारों पर न जा सकें और दुर्घटना न हो सके। लेकिन प्रशासन के निर्देश ताक पर रख दिए गए और रेत से भरे कट्टे रखे बिना ही बाईपास पर ट्रैफिक शुरू कर दिया गया।
कांवड़ यात्रा के कारण ट्रैफिक हुआ कम
कांवड़ यात्रा के कारण सड़क पर वाहन आम दिनों की अपेक्षा काफी कम दिख रहे हैं। इससे प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों को काफी मिली। यदि ऐसा नहीं होता तो सर्विस लेन पर जाम लग जाता और मरम्मत के काम में समस्याएं बढ़ जातीं।
फिर रेत ही किया जा रहा इस्तेमाल
निर्माण कंपनी ने हाईवे के निर्माण में रेतीली मिट्टी का प्रयोग किया था। यह मिट्टी बारिश नहीं झेल पाई और बह गई, जिससे सड़क धंस गई। इस कमी को एनएचएआई ने भी दूर नहीं किया और जहां मिट्टी खिसक गई थी वहां फिर वही रेतीली मिट्टी डाल दी गई। नतीजा यह हुआ कि चौबीस घंटे के अंदर ही मिट्टी फिर बह गई।