वो नूरानी रात आई है, गुनाहों से तौबा की रात आई है, मांग ले अपने अजीजों की मगफिरत, ये इबादत की रात आई है। शब-ए-बरात के मौके पर शहर का नजारा बिल्कुल अलग दिखा। विशेष सजवाट से सजीं मस्जिदों में रात भर इबादतों का सिलसिला जारी रहा तो कुछ लोगों ने कुरआन की तिलावत में रात गुजारी। वहीं कब्रिस्तानों में भी सजावट हुई। लोग कब्रिस्तानों में पहुुंचकर अपने अजीजों की मगफिरत की दुआ मांगी। वहां फातिहा पढ़ी और फूल चढ़ाए। नूरानी मंजर में कई जगह मजलिसें सजी।
शब-ए-बरात को लेकर दरगाह आला हजरत स्थित हजरत मन्नानी मियां के आवास पर महफिल सज। जानशीने आला हजरत मौलाना अल्हाज इमरान रजा खां समनानी मियां ने कहा कि ये रात गुनाहों से तौबा की रात है। इस मुबारक रात की इबादत सारी जिंदगी को आसान कर देगी। इंसान को इंसानी रिश्तों की मोहब्बत को कायम रखने के लिए नफरतों का खत्म कर देना चाहिए। अल्लाह भी उस बंदे से राजी होता है जो नेकी की राह पर चलता है।
खानकाहे निजामुद्दीन औलिया के खलीफा सूफी मोहम्मद आफताब महशर रजवी निजामी फिरदौसी ने कहा कि अल्लाह की रहमत इस रात में बरसती है। इस रात में इबादत करें। अल्लाह और उसके रसूल को याद करें। दुआएं मांगे। बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खां वारसी ने कहा कि अल्लाह सब्र करने वालों और नेक दिल इंसानों पर अपनी रहमत बरसाता है। शायर आरिफ उस्मानी बरेलवी ने अपने कलाम में कहा कि आई शब-ए-बरात ये रहमत की रात हैं जो चाहे मांग लो ये दुआओं की रात है।
सुन्नी के अलावा शिया हल्कों में भी इस खास रात को अकीदत के साथ मनाया। घरों को खास चिरागों से रोशन किया साथ ही नज्र नियाज का सिलसिला चलता रहा। इसके अलावा घरों व मस्जिदों में पूरी रात महिलाओं और पुरुषों ने इबादत की। शिया जामा मस्जिद को भी विशेष रूप से सजाया गय। यहां बड़ी संख्या में विशेष नमाज व दुआएं कीं। इमाम ए जुमा मौलाना शमसुल हसन खां ने शब-ए- बरात की फजीलत बयां की। कहा कि ये रात गुनाहों से तौबा की रात है लिहाजा हमें इस रात ज्यादा से ज्यादा इबादत में बसर करते हुए अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहिए। साथ ही अपने मरहूम अजीजों की मगफिरत की दुआएं मांगनी चाहिए। यूनाइटेड शिया मूवमेंट के प्रवक्ता समर अब्बास जैदी ने बताया कि मोहल्ला स्वाले नगर स्थित करबला में भी देर रात तक लोगों ने अपने अजीजों की कब्रों पर चिरागां करते हुए दुआएं मांगी।