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साहब के आदेश पर दौड़ा सिस्टम ‘बेचारा’ गोशाला को क्यों मिला एक करोड़ का ‘चारा’

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बरेली। सड़कों पर भटकने वाली लावारिस गायों और दूसरे पशुओं के लिए न्याय पंचायत स्तर पर बनाए गए निराश्रित पशु आश्रय स्थलों में चारे के बंदोबस्त के लिए भी शासन ने करीब एक करोड़ की रकम दे दी है, लेकिन इस रकम का क्या इस्तेमाल किया गया, यह रिपोर्ट अब तक आला अफसरों तक नहीं पहुंची है। अब प्रशासन ने इसकी जांच के लिए अफसरों को दौड़ा दिया है। दरअसल प्रशासन को सूचना यह मिली थी कि इन गोशालाओं में लावारिस पशुओं के चारे के लिए दी गई कुछ रकम का गोलमाल कर लिया गया है और बाकी रकम के भी गोलमाल की तैयारी है।
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निराश्रित गोवंशीय पशुओं को चारे-पानी की समस्या न पैदा हो, इसके लिए योगी सरकार में बरेली जनपद को एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस धनराशि से न्याय पंचायत स्तर पर गोशालाओं को तैयार किया जाना है, उनमें चारा-पानी और छाया का भी बंदोबस्त होना है। बताया जाता है कि धनराशि मिलने के बावजूद ज्यादातर जगहों पर अभी तक गोशालाओं को तैयार ही नहीं किया गया है। इसके अलावा जिन जगहों पर गोशालाएं बनी हैं, वहां आवारा पशुओं की जगह पशुपालकों के पालतू जानवरों को रखा जा रहा है। ऐसे में कई गांवों में लोगों ने आशंका जाहिर की है कि अधिकारियों के मानीटरिंग न करने से स्थानीय स्तर पर गोशाला बनाने और चारे की पूरी की पूरी रकम हड़पी जा सकती है।
ऐसी शिकायतें मिलने के बाद अब डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने अधिकारियों को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। डीएम खुद भी सीडीओ के साथ गोशालाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा बहेड़ी और दमखोदा के लिए डीडीओ, रामनगर व मझगवां के लिए डीआरडीए के पीडी, क्यारा व आलमपुर जाफराबाद के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, फतेहगंज पश्चिमी व मीरगंज के लिए एआर कोआपरेटिव, भोजीपुरा व शेरगढ़ के लिए एक्सईएन आरईएस, भुता व फरीदपुर के लिए उपायुक्त श्रम रोजगार, भदपुरा व नवाबगंज के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी और बिथरी ब्लॉक के लिए एई डीआरडीए को जांच अधिकारी बनाया गया है।
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इस योजना के लिए अभी काफी रकम आवंटित होनी बाकी है। अधिकारियों से सभी ब्लॉक में पशु आश्रय स्थल की जांच कराई जा रही है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम

कान्हा पशु आश्रय गृह की व्यवस्थाएं भी अधूरी
बरेली। सीबीगंज के गांव खड़ौआ में सांड़ों द्वारा कई गोवंश को मार देने के बाद कमिंश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला ने पशु चिकित्सकों की टीम के साथ नगर निगम के कान्हा पशु आश्रय गृह निरीक्षण किया था। वहां पर गाय और सांड़ को अलग-अलग रखने की व्यवस्था नहीं थी, टीन शेड भी कम था, जानवरों के उपचार हेतु 24 घंटे डॉक्टर, उपचार के लिए बाड़ा समेत तमाम खामियां मिली थीं। उन्होंने इन व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने इन्हें दुरुस्त करने का काम शुरू कराया। कुछ काम तो पूरे हो गए हैं लेकिन टिन शेड बनाने का काम अभी भी चल रहा है।
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