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बरेली-बदायूं फोरलेन घोटाला- टेक्निकल ऑडिट टीम ने पीडब्ल्यूडी के अफसरों से की पूछताछ

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बरेली। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बरेली-बदायूं फोरलेन के 280 करोड़ रुपये के घोटाले की फाइल फिर खुल गई है। शासन ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से इस प्रोजेक्ट से संबंधित सभी रिकार्ड मंगवा लिए हैं। इसके साथ ही टेक्निकल ऑडिट टीम ने इस घोटाले की जांच करते हुए अधिकारियों से पूछताछ भी की है। यह टीम सड़क निर्माण की क्वालिटी को चेक करने के लिए यहां पहुंच रही है। जल्दबाजी इसलिए भी है, क्योंकि हाईकोर्ट ने 15 दिन के अंदर इस घोटाले की जांच रिपोर्ट मांगी है।
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वर्ष 2016-17 में राजमार्ग संख्या-33 बरेली-बदायूं फोरलेन के निर्माण पर करीब 280 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। पीडब्ल्यूडी ने पीएनसी इंफ्रा टेक नाम की कंपनी को इसे बनाने का कांट्रेक्ट दिया गया था। शासन के साथ ही मई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इस सड़क के निर्माण में गोलमाल होने की शिकायत पहुंची, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने जांच के नाम पर लीपापोती करने के अलावा कुछ नहीं किया। शिकायत यह थी कि फोरलेन प्रोजेक्ट का एस्टीमेट 244 करोड़ रुपये था, लेकिन कंपनी को 280 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। पुरानी टू लेन सड़क की खुदाई से निकले काले पत्थर के मलबे और तारकोल को भी नई फोरलेन सड़क बनाने में खपा दिया गया। इस मामले में घोटालेबाजों पर कार्रवाई तो दूर अब तक जांच तक पूरी नहीं की गई है।
हाईकोर्ट के इस मामले का संज्ञान लेने और इसकी पंद्रह दिन के अंदर जांच पूरी करने के आदेश के बाद से पीडब्ल्यूडी में हड़कंप मचा हुआ है। शासन ने चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी से इस रोड के निर्माण से संबंधित तमाम रिकार्ड मांगे थे। यह भी पूछा गया था कि उनके स्तर से जांच में अब तक कौन से बड़ी खामियां पकड़ी गई हैं। लखनऊ से टेक्निकल ऑडिट टीम के सुशील कुमार ने चीफ इंजीनियर सहित पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के डिवीजन के अधिकारियों से भी फोरलेन निर्माण को लेकर जानकारियां जुटाई हैं। यह टीम सड़क का दौरा कर निर्माण की क्वालिटी को भी की चेक करेगी।
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बदायूं फोरलेन को लेकर शासन ने जो भी रिकार्ड मांगे थे, उन्हें उपलब्ध करा दिए गए हैं। रोड की जांच के लिए टेक्निकल ऑडिट टीम भी आने वाली है, जो सड़क निर्माण की क्वालिटी चेक करेगी।
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-राकेश राजवंशी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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