बरेली। रद ट्रेनों से यात्रियों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। त्रिवेणी एक्सप्रेस के यात्री गुवाहाटी एक्सप्रेस में नहीं चढ़ सके। कई यात्री तो गिरते-गिरते बच गए। यह यात्री टिकट वापस करने के लिए विंडो पर पहुंचे तो तीस रुपये काट लिए गए। दूसरी ओर पार्सल, रिजर्वेशन और साधारण टिकट न बिकने से रेलवे की आमदनी पर फर्क पड़ा है।
जंक्शन पर यात्रियों का बुरा हाल है। उन्हें लखनऊ की ओर जाने के लिए ट्रेनें नहीं मिल रही हैं, जो हैं भी उनमें जबरदस्त भीड़ होने के कारण यात्री चढ़कर भी उतर रहे हैं। बुधवार को भी अवध असम गुवाहाटी एक्सप्रेस में कुछ ऐसा ही हुआ। ट्रेन दोपहर 1.52 बजे जंक्शन पहुंची। प्लेटफार्म पर खड़े त्रिवेणी एक्सप्रेस के यात्रियों ने चढ़ने का प्रयास किया लेकिन यात्री दरवाजे तक ठसाठस भरे हुए थे, साधारण कोच का हाल काफी खराब था। कुुछ यात्रियों ने हिम्मत करके चढ़ने का प्रयास भी किया लेकिन कोच के अंदर की भीड़ ने उन्हें फिर से बाहर कर दिया जिससे वह प्लेटफार्म पर गिरते गिरते बचे। यही स्थिति जम्मूतवी सियालदह एक्सप्रेस में भी रही। ट्रेन जाने के बाद टिकट वापस करने के लिए विंडो पर पहुंचे तो तीस रुपये काटकर बाकी रुपये वापस कर दिए गए।
जंक्शन पर भटकती रहीं महजबीं
आंवला से लखनऊ जाने के लिए जंक्शन पहुंची। उन्होंने गुवाहाटी एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उन्हें चढ़ने नहीं दिया। वह बोली आखिर कब तक पटरियां ठीक होंगी। एक साल से परेशानी चल रही है। उन्हें बहुत जरूरी काम से लखनऊ जाना था।
इतनी पटरियां तो कभी खराब नहीं हुई
पीलीभीत के धर्मदेव भी लखनऊ जाने के लिए जंक्शन पहुंचे थे। भीड़ देखकर उनकी भी हिम्मत ट्रेन में चढ़ने की नहीं हुई। वह बोले कि 50 साल से यात्रा कर रहे हैं, इतनी पटरियां तो कभी खराब नहीं हुई जो सही होने का नाम नहीं ले रही हैं।
कोलकाता जाना था, छूट गई सियालदह एक्सप्रेस
पूरनपुर की मनमीत कौर पति के साथ कोलकाता जा रहीं थी। सियालदह एक्सप्रेस में भीड़ देखकर चढ़ नहीं सकी। हालांकि उनका रिजर्वेशन था, लेकिन सभी कोचों में यात्री ठसाठस भरे हुए थे। वह बोली अब कोलकाता के लिए रात में ट्रेन मिलेगी।
टिकट विंडो पर कट गए 30 रुपये
सुभाषनगर की मीना को शाहजहांपुर जाना था। भीड़ की वजह से ट्रेन छूट गई तो वह वापस करने के लिए विंडो पर पहुंची। 45 रुपये के टिकट में टिकट बाबू ने 30 रुपये काटकर 15 रुपये वापस कर दिए। यही उनके साथ जाने वाली राजकुमारी के साथ भी हुआ।
कामर्शियल अनुभाग को जबरदस्त घाटा
ट्रेनें न चलने से कामर्शियल अनुभाग को जबरदस्त घाटा हुआ है। रेलवे अधिकारियों को कहना है कि ट्रेनें न चलने से खर्चा न होने से नुकसान नहीं है, लेकिन जंक्शन पर करीब एक हजार अधिकारी कर्मचारी हैं, जिनका वेतन तो मिलना ही है। सूत्रों का कहना है पार्सल अनुभाग विभाग को 50 हजार रुपये, रिजर्वेशन आफिस को एक लाख और साधारण टिकट विंडों को तीन लाख रुपये रोज का घाटा है। जंक्शन से मिर्जापुर, रायबरेली, प्रतापगढ़ आदि स्टेशनों से समय पर पार्सल न आने व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।