बरेली। कैंट इलाके के एक प्रतिष्ठित स्कूल में फेल हुए 9वीं व 11वीं के विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों और एक शिक्षक ने बृहस्पतिवार को प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उन्होंने कहा कि प्रबंधन से जुड़े लोग धर्म परिवर्तन की मुहिम चला रहे हैं। इसी के लिए दबाव बनाने को तमाम विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया है, जिनमें से ज्यादातर एक वर्ग विशेष के हैं। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों के साथ बाद में ये लोग सीओ सिटी से भी मिले। सीओ ने स्कूल मैनेजर को तलब कर पूछताछ की और फिर जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी।
स्कूल में हंगामे के बाद करीब 50 विद्यार्थी अपने अभिभावकों और स्कूल के ही शिक्षक सिद्धार्थ के साथ सुबह 11 बजे सीओ सिटी के दफ्तर पहुंचे। विद्यार्थियों ने सीओ को बताया कि उनकी कक्षाओं में गिनती के ही बच्चे पास हुए हैं। फेल होने वालों में करीब अस्सी फीसदी एक समुदाय के हैं। फादर से लेकर शिक्षकों का दबाव है कि वे लोग धर्म परिवर्तन कर लें। इसी दबाव की वजह से उन्हें फेल कर दिया जाएगा। उन्होंने इस दबाव को नजरंदाज किया तो फेल कर दिया गया। सीओ सिटी ने इंस्पेक्टर कैंट को स्कूल प्रबंधन से बातचीत करने को कहा तो वे प्रबंधक को लेकर पहुंच गए। यहां सीओ के सामने दोनों पक्षों ने एकदूसरे पर आरोप लगाए। तब सीओ ने कहा कि शिक्षण से संबंधित समस्या जेडी और डीआईओएस को बताएं। धर्म परिवर्तन की जांच वे करा लेंगे। अभिभावकों और शिक्षक ने अलग-अलग पत्र सीओ को सौंपे।
शिक्षक ने कहा- चंदा मांगते हैं
शिक्षक सार्थक ने 70 वर्षीय सिस्टर पर आरोप जड़ा कि वह धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के साथ शिक्षकों को अपनी संस्था को चंदा देने को कहती हैं। जो ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ छात्राओं से शिकायत कराने की चेतावनी देती हैं। ऐसे ही दबाव में एक शिक्षक आत्महत्या कर चुके हैं। सीओ ने सार्थक से कहा कि वह तहरीर और सबूत दें, वह उसकी जांच करा लेंगे।
धर्म परिवर्तन का आरोप गलत
स्कूल प्रबंधक ने बताया कि धर्म परिवर्तन का आरोप निराधार है। बच्चे ज्यादा फेल हो गए हैं तो कुछ लोगों ने उन्हें उकसा दिया है। शिक्षक के आरोपों पर कहा कि उसे अस्थाई रूप से 31 मार्च तक के लिए ही रखा गया था। परफार्मेंस बेहतर न होने पर उसकी सेवा खत्म करने की तैयारी थी। शायद इसी वजह से वह इल्जाम लगा रहा है।
ऐसा नहीं लगता कि धर्म परिवर्तन के दबाव का मामला रहा होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर कमेटी से जांच करा ली जाएगी कि बच्चों को जानबूझकर तो फेल नहीं किया गया। ऐसा हुआ तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्टूडेंट अगर सही उत्तर लिखकर ही नहीं आए होंगे तो इसमें कुछ नहीं हो सकता।
- कुलदीप कुमार, सीओ सिटी