बरेली। थोक दवा कारोबारियों के संगठनों ने अब बैकफुट पर आते हुए कहा है कि वे पहले ये इंतजाम कराएंगे कि मरीजों के लिए दवाओं की कमी न हो, तभी अपने बच्चों के साथ सैरसपाटा करने जाएंगे। उधर, प्रशासन ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए पूरा कारोबार बंद कर सैरसपाटे पर जाने को अघोषित हड़ताल माना है। कहा है कि ऐसा करना नियमों के विरुद्ध है। लिहाजा इस मामले पर पूरी नजर रखी जाएगी।
थोक दवा कारोबारियों ने 30 दिसंबर से एक जनवरी तक सामूहिक सैरसपाटे का प्लान बनाया है, इसके लिए सभी थोक लाइसेंसियों से कहा गया है कि वे इसमें शामिल हों। साथ ही रिटेलरों को तीन दिन तक स्टाक बनाए रखने की सलाह भी दी है। इसे लेकर बाजार में घमासान शुरू हो गया है और दो गुट आमने-सामने आ गए हैं। अमर उजाला ने जब इसका खुलासा किया तो दवा बाजार में खलबली मच गई। एफएसडीए अफसरों ने भी पूछताछ शुरू कर दी। इस पर डिस्ट्रिक बरेली केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, सचिव रितेश मोहन गुप्ता और न्यू डिस्ट्रिक बरेली केमिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश ओबराय, सचिव सतीश चंद्र सेठी ने लिखित सफाई दी है। दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा है कि तीन दिन तक बंदी स्वैच्छिक और शरदकालीन अवकाश के तहत है। पूरे साल कारोबार में व्यस्तता से परिवार के सदस्यों के साथ सैरसपाटा नहीं हो पाता है। किसी सहयोगी कारोबारी पर इसका कोई दबाव नहीं है। जिसका जी चाहे दुकान खोल सकता है। रिटेल दुकानदारों से कहा है कि वे स्टाक बना लें।
सामूहिक बंदी अनुचित
एडीएम (प्रशासन) आरएस पांडे ने कहा है कि थोक कारोबारी सरकार द्वारा प्रदत्त लाइसेंस पर व्यापार करते हैं, इसलिए लाइसेंस की शर्तें उन पर लागू होती हैं। सामूहिक अवकाश के नाम पर बंदी करना अनुचित है। इसकी जांच सीएमओ, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) से कराकर कार्रवाई तय होगी। उधर, सहायक आयुक्त औषधि आरपी पांडे ने कहा कि गुरुवार दोपहर इस पूरे प्रकरण में विभागीय पड़ताल कराएंगे। पांडे ने फिर दोहराया है कि इस तरह की बंदी अनुचित और नियम विरुद्ध है।