बरेली। सेतु निगम के अफसर लाल फाटक रोड पर रूट डायवर्जन न होने से ओवरब्रिज निर्माण में अड़चन की बात कह रहे हैं, जबकि यहां एक बड़ी समस्या अतिक्रमण की है। सड़क के दोनों तरफ चिह्नित अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। अवैध कब्जे न हटने से जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल रहा है। खास बात यह है कि पूर्व में सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने पैमाइश करके दर्जनों घरों-दुकानों पर लाल निशान लगाए थे। इन्हें नोटिस भी दिए गए। कुछ अवैध कब्जे हटाए भी गए, लेकिन फिर कार्रवाई रोक दी गई। इसका नतीजा यह हुआ कि पुराने कब्जे तो हटे नहीं, नई जगहों पर भी अतिक्रमण होने लगा है।
लाल फाटक पर ओवरब्रिज बनाने के लिए सेतु निगम को 32.25 मीटर चौड़ी सड़क की जरूरत है, जबकि वहां तीन से पांच मीटर तक लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। इससे फ्लाईओवर के साथ ही सर्विस रोड और नाला निर्माण के लिए भी जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। चूंकि यह सड़क लोक निर्माण विभाग (भवन खंड) की है, इसलिए जिला प्रशासन के आदेश पर सेतु निगम के साथ पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की संयुक्त टीम ने करीब आठ माह पहले पैमाइश करके पांच दर्जन छोटे-बड़े अतिक्रमण चिह्नित कर लाल निशान लगाए थे। अवैध कब्जेदारों को नोटिस भी जारी हुए थे। इस कार्रवाई से घबराकर कुछ लोगों ने तो खुद ही कब्जे तोड़ लिए। बाद में सेतु निगम की जेसीबी की मदद से पीडब्ल्यूडी ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, लेकिन कुछ जगहों पर अतिक्रमण तोड़े जाने के बाद अभियान बीच में ही छोड़ दिया। महीनों गुजरने के बावजूद करीब तीन दर्जन अवैध कब्जे अब तक नहीं हटाए जा सके हैं। ऐसे में सर्विस लेन बनाने को भी जगह नहीं मिल पा रही है।
दोनों रेलवे क्रॉसिंग के बीच में भी दुकानदारों के कब्जे
लालफाटक पर दोनों रेलवे क्रॉसिंग के बीच भी पीडब्ल्यूडी की जमीन है, जबकि उसके किनारे भी तमाम दुकानदारों ने कब्जे कर रखे हैं। इससे सड़क संकरी हो गई है। सेतु निगम ने इस जगह पर भी पिलर बनाने के काम की शुरूआत कर दी है, लेकिन कब्जे न हटने से जाम की दिक्कत बनी हुई है। सेतु निगम के अफसर यह मामला पीडब्ल्यूडी का बताते हुए हाथ खड़े कर रहे हैं।
रोड के दोनों साइड में कब्जे चिह्नित हुए थे। इसमें कुछ जगहों पर अतिक्रमण भी हटाए गए थे। निर्माण कार्य चल रहा है। इस दौरान जहां जरूरत पड़ती है, वहां से कब्जे हटा दिए जाते हैं। - नवाब सिंह, उप परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम