पाकिस्तान की ओर से बार-बार दी जा रही परमाणु हमले की धमकी और इसकी संभावना को देखते हुए भारतीय सेना ने जवानों को सुरक्षित रखने के लिए एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है। जो परमाणु या जैविक हमला होने पर भी 72 घंटे तक सैनिकों को रेडिएशन से सुरक्षित रखेगी। हालांकि, इसके बाद सैनिकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना होगा। रेडिएशन के दौरान भी एंटी एटॉमिक किट से लैस जवान दुश्मनों को धूल चटा सकेंगे।
जाट रेजीमेंट सेंटर में आयोजित पराक्रम पर्व में मौजूद सैन्य अधिकारी जीएसओ-1 मेजर सौरभ गुप्ता (प्रशिक्षण) ने बताया कि मद्रास इंजीनियर ग्रुप (मद्रास सैपर्स) ने न्युक्लियर बॉयोलॉजिकल एंड केमिकल (एनबीसी) हमले से बचाव के लिए इंटीग्रेटेड फ ील्ड इंसुलेटर तैयार किया है। जोकि एटॉमिक रिएक्शन, रेडियशन को पूरी तरह रोकने में सक्षम है, जिसके अंदर रेडिएशन से हुए संक्रमण के इलाज के साथ ही शुद्ध पानी, हवा, भोजन, टॉयलेट समेत अन्य सुविधाएं मौजूद होंगी। प्रत्येक इंसुलेटर में चार केबिन हैं। एक केबिन में करीब 30 जवान 72 घंटे तक रह सकेंगे। इस लिहाज से एक इंसुलेटर 120 जवान यानी पूरी एक युनिट को सुरक्षित रखने की क्षमता से लैस है। ऐसे में परमाणु, जैविक या रसायनिक हमला होने पर घायल जवान को तत्काल इंसुलेटर में ले जाया जाएगा। वहीं इंसुलेटर से बाहर निकलने से पहले जवान को ‘एंटी एटॉमिक किट’ पहननी होगी। जो रेडिएशन के प्रभाव से उसे सुरक्षित रखेगी।
क्या है एंटी एटॉमिक किट
परमाणु हमले के बाद जवानों को रेडिएशन से सुरक्षित रखने के लिए एंटी एटॉमिक किट तैयार की गई है। किट में केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एंड न्युक्लियर डिफेंस (सीबीआरएन) स्मोक, ट्राउजर, रेस्पिरेटर, ओवर बूट, ग्लव्स, हुड मास्क, सीएएस बैग हाफ, फुल, आरवीडी किट, केमिकल एजेंट मॉनीटर, पीडीके किट, पोर्टेबल डोज रेट मीटर, वाच मीटर आदि रेडिएशन से बचाने के और उन्हें पहचानने के उपकरण मौजूद रहेंगे।
संवेदनशील जोन में बनाए जा रहे
सैन्य अधिकारियों के मुताबिक दस करोड़ की लागत से एक इंटीग्रेटेड फील्ड इंसुलेटर बनाया जाता है, जो देश के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में तैयार किए जा रहे हैं। बताया कि जमीन के करीब दस फीट गहराई में यह इंसुलेटर बनेगा। प्रत्येक युद्ध स्थल पर इंसुलेटर बनाने के उपकरण स्टोर किए जा चुके हैं, जिसमेें जेनरेटर, डेकोरिमिनेटन मॉडयूल, वाटर टैंक, लिविंग मॉड्यूल, यूटिलिटी, एक्जिट आदि यूनिट शामिल हैं। युद्ध का विगुल बजते ही तीन दिन में एक इंसुलेटर तैयार हो जाएगा।
सीरिया में रसायन और जापान के नागासाकी हिरोशिमा में परमाणु हमला हो चुका है। अगर भारतीय सेना पर युद्ध के दौरान ऐसा कोई हमला हुआ तो भी जवान इंटीग्रेटेड फील्ड इंसुलेटर में सुरक्षित रहेंगे। जिस पर न्युक्लियर, बॉयोलॉजिकल, केमिकल अटैक का कोई असर नहीं होगा। - ब्रिगेडियर इंद्रजीत सिंह, जीओसी, जाट रेजीमेंट सेंटर