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लाशें खुलते ही मनोज ने मां को पहचान लिया

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बरेली। सिटी श्मशान भूमि में पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने जैसे ही लाशें खुलवाकर चिताओं पर लगवानी शुरू कीं, इसी बीच मनोज ने नथनी से अपनी मां कलावती के शव को पहचान लिया। उसने फोटो खींची और इसे दिखाकर अधिकारियों को यह समझाने की कोशिश की कि उसकी मां की पहचान हो गई है, लेकिन किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
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रविवार रात बस हादसे में बन्ने तले कस्बा दरियाबाद रामसनेही घाट बाराबंकी का श्रीकृष्ण घायल हो गया था। उसकी पत्नी कमला देवी की मौत हो गई थी। अगले दिन श्रीकृष्ण ने इलाज के दौरान लखनऊ में दम तोड़ दिया था। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद बृहस्पतिवार को कमला देवी का बेटा मनोज अपने भाई संदीप कुमार को लेकर बरेली आ गया। संदीप कुमार ने कमला देवी के शव से डीएनए का मिलान कराने के लिए डीएनए सैंपल दिया। शुक्रवार को पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने शवों को श्मशान भूमि पहुंचाकर चिताओं पर रखवाना शुरू किया तो संदीप और मनोज ने नथनी से अपनी मां को पहचान लिया।

खिड़की से कूदकर मनोज ने बचाई थी जान
हादसे में मरे दंपति श्रीकृष्ण और कमला देवी के साथ उनका बेटा मनोज भी इसी रोडवेज बस से घर लौट रहा था। मनोज कुमार ने बताया कि वह अपनी ससुराल उत्तम नगर दिल्ली से लौट रहा था। वह माता-पिता के बीच में बैठा हुआ था। घटनास्थल से कुछ दूर पहले ही चालक ने बस से नियंत्रण खो दिया। डीजल टैंक फटने के बाद चालक चाहता तो बस को आगे बढ़ा सकता था, लेकिन उसने अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी। उसने चालक की साइड की खिड़की से कूदकर जान बचाई। इसके बाद वह बस में फंसे लोगों को बचाने के लिए कोशिश करता रहा, लेकिन बस से उठ रहीं लपटों के कारण वह सफल नहीं हो पाया।
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