बरेली। सोमवार को बीएड की पूल काउंसलिंग का अंतिम दिन था। लेकिन मेरठ में तबरेज कांड में विरोध प्रदर्शन के चलते इंटरनेट सेवाएं बंद होने से वहां के तमाम अभ्यर्थी फीस नहीं जमा कर सके। इसके चलते वहां के कॉलेज संचालक पूरे दिन परेशान रहे और विश्वविद्यालय में बने कंट्रोल रूम में फोन करके तिथि बढ़ाने की मांग करते रहे।
इस बार बीएड प्रवेश प्रक्रिया की जिम्मेदारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय को दी गई है। प्रवेश परीक्षा में पांच लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन एडमिशन कम हो रहे हैं। पहले चरण में करीब 67,500 और दूसरे चरण में करीब 65,500 अभ्यर्थियों ने फीस जमा करके एडमिशन लिया है। वहीं, 28 जून से शुरू हुई पूल काउंसलिंग का सोमवार को अंतिम दिन था। मेरठ के अभ्यर्थियों को सोमवार को फीस जमा करने के लिए परेशान होना पड़ा। तबरेज कांड को लेकर विरोध प्रदर्शन के चलते वहां इंटरनेट सेवाएं बाधित होने से दिक्कत हुई। इसके चलते तमाम अभ्यर्थियों ने आसपास के शहरों में जाकर फीस जमा की या फिर फीस जमा ही नहीं कर सके। वहां की दिक्कतों को लेकर तमाम लोग विश्वविद्यालय में बने कंट्रोल रूम में फोन करते रहे।
तिथि बढ़ने की अब संभावना नहीं
प्रवेश प्रक्रिया के राज्य समन्वयक प्रो. बीआर कुकरेती ने बताया कि अब तारीख बढ़ने की संभावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आठ जुलाई तक सारी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में मेरठ के अभ्यर्थियों के लिए अब मौका नहीं दिया जा सकता।
51 हजार ने कराई पूल काउंसलिंग
सोमवार को पूल काउंसलिंग के अंतिम दिन रात आठ बजे तक आंकड़ा 51 हजार तक पहुंच गया। इसके बाद भी 30 हजार से अधिक सीटें खाली रह जाएंगी। संभावना जताई जा रही है कि काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय इन सीटों पर कॉलेजों को सीधे एडमिशन की अनुमति दे देगा।