बरेली। नवाबगंज में खतौनी खुरचकर जमीन घोटाले की जांच के मामले में एक के बाद एक कड़ियां खेल रही हैं। इसी के साथ साजिश में शामिल होने वालों के चेहरे भी बेनकाब होने लगे है। हालांकि जमीन की खतौनी में फर्जी इंद्राज दर्ज करने और एडीएम सिटी के नाम फर्जी चिट्ठी जारी कर साजिश रचने वाले मास्टर माइंड तक जांच की आंच नहीं पहुंची है। एडीएम सिटी ने जब चकबंदी दफतर के चपरासी मकरुद्दीन को शक के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया तो उसे हार्ट अटैक पड़ गया।
तहसीलदार को जारी लेटर बदलकर फर्जी पत्र देने में कही चकबंदी दफतर के चपरासी का तो हाथ नही है। यह जानने के लिए एडीएम ने उसे तलब किया था लेकिन चपरासी चकबंदी दफ्तर से निकल गया और एडीएम के सामने पेश नही हुआ। शाम को एडीएम ने जब फिर स्टाफ से उस चपरासी के बारे में पता किया तो बताया गया कि उसे हार्ट अटैक पड़ गया है और वह किसी हॉस्पिटल में भर्ती है। नवाबगंज के गांव डंडिया नजमुल निशा के अबरार हुसैन की करीब 100 बीघा जमीन की खतौनी पर तारिक नाम के एक शख्स ने वर्ष 2005 में फर्जी तरीके से अपना नाम दर्ज करा लिया था। बाद में चकबंदी न्यायालय ने इसे निरस्त कर दिया था। उसके बाद वर्ष 2016 में कोर्ट के आदेश पर आदेश पर सफेदा लगाकर उस आदेश को पलट दिया गया। इस मामले की जांच एडीएम सिटी ने शुरू करते हुए जब नवाबगंज के तहसीलदार को लेटर जारी किया तो किसी ने उनके लेटर को गायब कर दिया और तहसीलदार के नाम से फर्जी लेटर तहसील को भेज दिया।
क्या तारिक का भूत आया था दस्तखत करने
अब तक की जांच में ये सामने आया है कि खतौनी खुरचन कांड में जिस तारिक का नाम 2005 में सामने आया है, वह वर्ष 2006 में मर चूका है। इसके बाद भी वर्ष 2016 में इस मामले के वकालतनामे पर उसके दस्तखत हैं। अगर तारिक की पहले ही मौत हो चुकी है तो उसका भूत हस्ताक्षर करने आया था। एसीएम प्रथम जलालुद्दीन ने इस मामले में नवाबगंज और बरेली के दो अधिवक्ताओं को पूछताछ के लिए बुलाया है।
नवाबगंज जमीन घोटाले में चकबंदी दफ्तर के चपरासी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पता चला है कि वह उनके आफिस के बाहर तक आया था उसे हार्ट अटैक पड़ गया। ओपी वर्मा, एडीएम सिटी