फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वाइन फ्लू से मौत, सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट जारी, रखें ये सावधानी

Sat, 19 Jan 2019 02:42 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन
स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर हफ्ता भर चुपचाप बैठे रहे। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नौ जनवरी को ही उन्होंने सीएमओ कार्यालय में रिपोर्ट भेज दी थी। नियमानुसार इसके फौरन बाद आईडीएसपी टीम को पीड़ित महिला के घरवालों और निकट संबधियों को प्रोटेक्टिव वैक्सीन दी जानी चाहिए थी, लेकिन अफसर तब हरकत में आए जब शुक्रवार को डॉ. विवेक की मौत हो गई। इसके बाद टीम भेजकर परिजनों को प्रोटेक्टिव वैक्सीन लगाई गई। स्वास्थ्य विभाग अपने बचाव में अब 16 जनवरी को अस्पताल की रिपोर्ट मिलने की बात कह रहा है।
विज्ञापन


सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने बताया कि स्वाइन फ्लू से मौत की सूचना मिलने से पहले ही सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट जारी कर दिया गया था। किसी भी मरीज में स्वाइन फ्लू का शक होते ही तत्काल सूचित करने के निर्देश दिए हैं। सूचना दिए बगैर स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर ऐपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

आरआटी (रैपिड रिस्पांस टीम) को भी अलर्ट कर दिया गया है जो स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की जांच कराकर इलाज मुहैया कराएंगे। जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है। सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि वार्ड में जरूरी सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। पर्याप्त स्टाफ भी तैनात कर दिया है।
विज्ञापन


ये लक्षण हों तो हो जाएं सतर्क, महिला-बच्चे होते हैं ज्यादा शिकार
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य इन्फ्लुएंजा की तरह ही होते हैं, यानी बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब होना, मांसपेशियों व सिर में दर्द, खांसी, दस्त, कमजोरी का एहसास आदि। स्वाइन फ्लू के मरीज में ये लक्षण इन्फ्लुएंजा के मुकाबले काफी तीव्र होते हैं। तेज सूखी खांसी, तेज बुखार, बेहद कमजोरी, हाथपांव में तेज दर्द, गले में चुभन, खांसते हुए खून निकलना आदि इसके विशिष्ट लक्षण हैं। आईडीएसपी के डॉ. मीसम अब्बास ने बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर एच1एन1 तेजी से प्रभावी होता है। इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है। उन्होंने अस्थमा, डायबिटीज और श्वांस रोग के मरीजों के लिए घातक बताया है।

बरेली में वायरस नहीं
आईडीएसपी के डॉ. मीसम अब्बास का दावा है कि बरेली जिले में स्वाइन फ्लू का वायरस नहीं है। शुक्रवार को मिलक (रामपुर) की रहने वाली महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हुई है। कहा कि वर्ष 2009 में डायग्नोज हुआ पहला केस भी मिलक का ही था। स्वाइन फ्लू संक्रामक है, इसलिए संभव है कि पहले जो केस सामने आए उनके पीड़ित अन्य कहीं से इन्फेक्टेड हुए हों।

ऐसे फैलता है एच1 एन1 वायरस
स्वाइन फ्लू वायरस का इंसानों में संक्रमण उसके श्वसन तंत्र से शुरू होता है। मरीज के छींकने, खांसने, हाथ न धोने, छूने, हाथ मिलाने, बगैर हाथ धोए मुंह या नाक को छूने से फ्लू होने की संभावना रहती है। संक्रमित व्यक्ति के ऐसे उपकरणों का स्पर्श करना जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, इससे भी संक्रमण फैल सकता है। इसमें दरवाजे के हैंडल, टेलीफोन रिसीवर, मोबाइल या टॉयलेट के नल के स्पर्श के बाद नाक पर हाथ लगाने भर से संक्रमित हो सकते हैं। इसके अलावा बस, ट्रेन में यात्रा के दौरान भी संक्रमित व्यक्ति के बैठे, छुए स्थान को छूने से भी फैलता है।

सावधानी
- हाथों को साबुन या सॉल्यूशन से धोते रहना
- नाक और मुंह को हमेशा मास्क से ढंके रहना
- जरूरत हो तभी सार्वजनिक जगहों पर जाएं
- संक्रमण के लक्षण मिलते ही एंटीवायरल ड्रग लें
- पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं
- संक्रमित व्यक्ति से करीब एक मीटर की दूरी बना रखें

स्वास्थ्य विभाग का रिकॉर्ड: 10 सालों में 15 मौत
आईडीएसपी के रिकॉर्ड के मुताबिक स्वाइन फ्लू से नौ सालों में 15 मौतें हो चुकी हैं। वर्ष 2011 से 2014 तक एक भी केस सामने नहीं आया था। संदेह के आधार पर स्वाइन फ्लू का पहला मामला वर्ष 2009 में डायग्नोस हुआ था। वर्ष 2019 में दोे सैंपल सैंपल लिए गए थे, जिसमें डॉ. विवेक शर्मा उर्फ डिंपल का सैंपल पॉजिटिव मिला। दूसरा, बदायूं के एक व्यक्ति का सैंपल संदेश के आधार पर लिया गया था लेकिन वह निगेटिव रहा।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें