जंक्शन पर बैठे प्रवासी श्रमिक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
17.22 हजार प्रवासी मजदूर इस समय मनरेगा में कर रहे काम
बरेली। दूसरे राज्यों से आने वालों कामगारों के लिए अब मनरेगा दो वक्त की रोटी का जरिया बन रही है। लॉकडाउन में घर आए 18.5 हजार प्रवासी मजदूरों में से 17.22 हजार योजना के तहत गांवों में ही काम कर रहे हैं। गांवों में जल संचयन, खेत समतलीकरण और चकरोड निर्माण सरीखे काम करके प्रवासी मजदूर अपने परिवार का खर्च चला रहे हैं।
मजदूरों का पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना लागू कर रखी है। योजना के तहत मजदूरों को गांव में ही सौ दिन का काम देने का प्रावधान है। मजदूरों ने योजना के तहत अपना पंजीकरण तो करा लिया, लेकिन ज्यादा कमाई के लालच में वे गांव छोड़कर दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में चले गए। इस तरह बड़ी संख्या में मजदूरों ने मनरेगा से दूरी बना रखी थी। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन लागू किया तो बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर गांव लौटने लगे। जिले में अब तक करीब 18 हजार 503 मजदूर वापस आ चुके हैं। क्वारंटीन की अवधि पूरी करने के बाद जब मजदूर दिहाड़ी को लेकर परेशान होने लगे तो मनरेगा उनका सहारा बनी। इन दिनों ग्राम पंचायतों में जल संचयन, खेत समतलीकरण और चकरोड निर्माण आदि कराया जा रहा है। इनमें 17 हजार 222 प्रवासी मजदूर लगे हैं।
ग्राम सभाओं में मनरेगा के तहत जल संवर्धन के साथ ही मिट्टी का काम कराया जा रहा है। इन दिनों प्रवासी मजदूर भी काम की मांग कर रहे हैं। प्रधान और ग्राम पंचायत सचिवों से कहा गया है कि शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए कार्य कराएं। लगभग 17 हजार 222 प्रवासी मजदूरों के जॉब कार्ड भी बनवा दिए गए हैं। उन्हें काम भी मिल गया है। करीब एक हजार प्रवासी श्रमिक ही ऐसे हैं जिन्होंने क्वारंटीन की अवधि अभी पूरी नहीं की है। इन्हें अभी काम नहीं दिया गया है और न ही उनका जॉब कार्ड बना है। - गंगाराम, मनरेगा उपायुक्त।