बरेली। जाट रेजीमेंट से करीब 1000 जवानों ने पहली बार आरएन टैगोर इंटर कॉलेज में अपना वोट डाला। बहुत से सैनिक परिवारों से वीर नारियां भी वोट डालने मतदान केंद्र पर आई थीं, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में नहीं थे। सूर्य की तपिश में दोपहर में आई सैनिक परिवारों की वीर नारियां मतदाता सूची में अपना नाम न देखकर मायूस हुईं। बहुत देर तक मतदान केंद्र में रहने के बाद लौट गईं।
जाट रेजीमेंट कमांडेंट ने बताया कि सेना में भर्ती जवानों को पहली बार वोट डालने की व्यवस्था की गई। उनके वोट भी बनवाए गए थे। सैनिक अपना वोट डालकर बहुत खुश थे। अपना नाम छापने से बचते हुए इन वीर जवानों का कहना था कि देश की सरकार चुनने में उनकी भी भूमिका होनी चाहिए। पहली बार ईवीएम पर वोट डालकर उनको बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। संकेतों में सैनिकों ने यह भी बताया कि देश की सुरक्षा और दुनिया में भारत को मजबूत देश के रूप में पहचान देने वाली सशक्त सरकार दोबारा आने के लिए उन्होंने वोट डाला है। उनके लिए देश पहले है, बाकी सब बाद में। उधर, सैनिक परिवारों की शिवानी, सीमारानी, पुष्पा देवी, नीता, साधना, पिंकी, रेनू, प्रीति, गीता, पूजा, अन्नू, सुनीता, अनुपम, नीरज देवी, ममता, सोनम, सुषमा, आदि का कहना था कि उनका नाम मतदाता पर्ची में नहीं है। पीठासीन अधिकारी और मतदान अधिकारी ठीक से जवाब नहीं दे रहे। मतदाता सूची में नाम न होने से 700 वोट नहीं पड़ पाए।
टुकड़े-टुकड़े गैंग को रोकने के लिए डाला वोट
रिटायर्ड सैनिक चौधरी कुलदीप सिंह पवार अपनी पत्नी रीना देवी और बेटी रश्मि के साथ आरएन टैगोर मतदान केंद्र पर वोट डालने आए। उनका कहना था कि जेएनयू में देशद्रोही गैंग ने टुकड़े-टुकड़े गैंग के नारे लगाए। अब वह चुनाव लड़ रहा है। ऐसे व्यक्ति की नारेबाजी के खिलाफ उन्होंने कोर्ट में रिट डाल रखी है। कोर्ट में केस चल रहा है। वह टुकडे-टुकड़े गैंग को रोकने और राष्ट्रवादी सरकार बनाने के लिए वोट डालने आए हैं।