बरेली। रामकथा के अंतिम दिन संत मोरारी बापू ने सरकारों को आइना दिखाते हुए गांवों की दशा पर गहरा दुख जताया। बोले, देश के स्वतंत्र होने के 70 साल बाद भी गांवों की दशा जस की तस हैं, उनमें अब तक जरूरी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। गांवों के लोग एक झोपड़ी और भरपेट रोटी के लिए तरस रहे हैं। उनका जीवन अंधेरे में कट रहा है। मोरारी बापू ने नेताओं से निवेदन किया कि वे सच्चे हृदय से गांवों की सेवा करें और उन्हें संवारें। उन्होंने कहा कि समाज को अपराधों से मुक्ति दिलाने का भी यही सर्वश्रेष्ठ उपाय है।
संत मोरारी बापू ने ‘मानस अपराध’ कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए रविवार को कहा कि मानस के तीन अर्थ हैं। पहला मन, दूसरा हृदय और तीसरा मनुष्य है। बताया कि मन का स्वभाव है कि वह एक समय एक ही जगह रहता है, जबरदस्ती कहीं मन लगाना अपराध है। मन की सहज गति में रुकावट न की जाए। उन्होंने श्रीकृष्ण और गोपियों की कथा सुनाई। उन्होंने राम कथा के प्रत्येक पात्र से ज्ञान लेने का सुझाव दिया। कहा, जब मन राम में रम जाए तो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने ह्रदय गति के अनुसार व्यवहार करने की सलाह देते हुए कहा कि हर बात में अक्ल नहीं लगानी चाहिए। जो ह्रदय गति और समय को समझने वाला हो वह ‘साधु’ है। बताया कि कलयुग में युवाओं के मन की गति बहुत तेज है। मन का स्वभाव स्थिर होते हुए भी वह अस्थिरता धारण कि ए है। मन केंद्रित कर उसे सत्कर्म और साकार दृष्टिकोण के साथ स्थिर रखने का सुझाव दिया।
तनाव से बचना है तो अर्धांगिनी को दें स्वतंत्रता
संत मोरारी बापू ने कहा, पति पत्नियों को अपनी संपत्ति समझते हैं। खुद देर रात तक मोबाइल पर बात करें, मेसेज करें, बगैर सूचना दिए कहीं भी घूमें, लेकिन पत्नी यह करे तो नाराज हो जाते हैं। कहा, ऐसे कई तनावग्रस्त लोग उनके पास आते हैं। जो बात बढ़ने पर परेशान होकर संतों से मुक्ति का मार्ग पूछते हैं। ऐसे लोगों को उन्होंने सुझाव दिया कि पत्नी को बांधें नहीं स्वतंत्रता दें। पत्नियों को स्वतंत्रता मिलने पर मर्यादा में रहने को कहा।
अपराध बोध हो तो श्रीहरि का नाम जपो
उन्होंने अपराध रोकने में असफलता मिलने पर अपराध बोध का ज्ञान कराने का साहस जगाने की बात कही। बताया कि बालि ने भाई और उसकी धर्मपत्नी तारा का अपराध किया। रावण ने सीता का अपराध किया। हम अपराधों को रोक नहीं पाएंगे, लेकिन अपने अपराध का अपराध बोध होने पर प्रभु श्रीराम के नाम का जप करने को कहा। बताया कि प्रभु राम का नाम पापों को काटने वाला है।
गोपी जैसे प्रभु से करो प्रेम, मिलेगी मुक्ति
उन्होंने बताया कि संसार एक माया जाल है, जिससे निकलने का एक रास्ता साधना और दूसरा हरिनाम है। कहा, गरीब की झोंपड़ी के खाने में जो स्वाद आता है वह छप्पन भोग में नहीं। क्योंकि गरीब के पास जो भी होता है वह हाड़तोड़ मेहनत से जुटाया होता है। एक-एक निवाले की कीमत छप्पन भोग के पकवानों से अधिक होती है। इसलिए स्वाद अधिक होता है। कथा में मोहता परिवार, केके दमानी, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, आरके अग्रवाल, जगदीश भाटिया आदि मौजूद रहे।