फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाजपा के लिए इस बार आसान नहीं होगी लड़ाई

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। वैसे तो बरेली सीट पर सियासत के दिग्गज खिलाड़ी संतोष गंगवार ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर का फायदा उठाकर 240685 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से समाजवादी पार्टी की आयशा इस्लाम को हराया था लेकिन इस बार उनका जादू किस हद तक मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलेगा, इस पर कयास लगाए जा रहे हैं। इतना जरूर माना जा रहा है कि मुकाबला इस बार कड़ा होगा और इसके साथ इस सीट पर हार-जीत का अंतर भी काफी करीबी रह सकता है।
विज्ञापन

अगर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों को छोड़ दें तो संतोष गंगवार 1989 से वर्ष 2014 तक कम या ज्यादा वोटों के अंतर से लगातार इस लोकसभा सीट पर भाजपा का परचम फहराते रहे हैं। 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण सिंह ऐरन ने बेहद अप्रत्याशित तौर पर संतोष गंगवार को 9400 वोटों से हराया था। उस समय लंबे समय बाद कांग्रेस ने भाजपा से यह सीट छीनी थी। इससे पहले 1984 में बेगम आबिदा अहमद कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती थीं। 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार और बसपा से इस्लाम साबिर को चुनाव मैदान में उतारा था। सपा और बसपा के मजबूत प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से भाजपा के समीकरण गड़बड़ा गए और उसे अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। 2014 में संतोष गंगवार ने मोदी लहर का फायदा उठाते हुए दोबारा यह सीट जीत ली। इस बार सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा को कड़ी चुनौती पेश करेंगे। सपा-बसपा गठबंधन के वोटों का गणित भी भाजपा को चिंता में डालेगा।

लोकसभा चुनाव- 2014 में वोटों का गणित
बरेली सीट
प्रत्याशी मिले वोट पार्टी अंतर
संतोष गंगवार 518258 भाजपा 240685 वोट
आयशा इस्लाम 277573 सपा ---
उमेश गौतम 106049 बसपा ---
प्रवीण सिंह ऐरन 84213 कांग्रेस ---
2019 में राजनीतिक समीकरण
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार एक बार फिर भाजपा से मैदान में हैं। इस बार उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण सिंह ऐरन नई चुनौती के साथ सामने हैं। इस बार सपा-बसपा गठबंधन है, लिहाजा दोनों दलों से एक ही प्रत्याशी मैदान में होगा। अभी गठबंधन के प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार है। चुनावी समर के असली पत्ते को सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी की घोषणा के बाद ही खुल पाएंगे। फिलहाल, इस बार भाजपा को कड़े त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन


कड़ी होगी धर्मेंद्र की चुनौती, गठबंधन से बदलेंगे चुनाव के समीकरण
बरेली। आंवला लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप 1.38 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से 2014 का लोकसभा चुनाव जीते थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सर्वराज सिंह को हराया था। बसपा की प्रत्याशी विधायक सिनोद कुमार शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य तीसरे नंबर पर रही थीं। इस बार फर्क यह है कि सपा-बसपा गठबंधन की प्रत्याशी के तौर पर बिजनौर के राजघराने की सदस्य रुचिवीरा को यहां लांच किया गया है, जबकि सर्वराज सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
यानी गठबंधन के साथ सिर्फ इतना बदलाव हुआ है कि सुनीता शाक्य की जगह रुचिवीरा चुनावी मैदान में उतरी हैं। हालांकि गठबंधन चुनाव का नतीजा तय करने के लिए बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। इसके साथ अब आंवला से मुस्लिम वोटों का गणित भी निर्णायक की भूमिका में रहेगा। पिछली बार मुस्लिम वोट सपा के साथ कांग्रेस प्रत्याशी सलीम इकबाल शेरवानी के पक्ष में भी गया था। इस बार आंवला से मुस्लिम प्रत्याशी न होने से सपा-बसपा गठबंधन मजबूत स्थिति में हैं। वैश्य समुदाय का वोट भी अगर गठबंधन की ओर गया तो भाजपा की चुनौतियां बढ़ेंगी। कुल मिलाकर यहां भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस में कड़े त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं। जाहिर है कि इस बार भाजपा को अपनी यह सीट बरकरार रखने के लिए नई रणनीति तैयार करनी पड़ेगी। हालांकि जातिगत वोटों के गणित के आधार पर धर्मेंद्र कश्यप की मजबूती कहीं कम नहीं लगती, लेकिन चुनाव का फैसला इस पर भी निर्भर करेगा कि कौन उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाता है।

लोकसभा चुनाव- 2014 में वोटों का गणित
आंवला सीट
प्रत्याशी का नाम मिले वोट पार्टी अंतर
धर्मेंद्र कश्यप 409533 भाजपा 138326 वोट
सर्वराज सिंह 271207 सपा ---
सुनीता शाक्य 189954 बसपा ---
सलीम इकबार
शेरवानी 93823 कांग्रेस --

2019 में राजनीतिक समीकरण
निवर्तमान सांसद धर्मेंद्र कश्यप को एक बार फिर भाजपा ने उतारा है। इस बार धर्मेंद्र कश्यप के सामने बसपा की रुचि वीरा हैं, जो बिजनौर से विधायक रह चुकी हैं और वैश्य समुदाय से हैं। पिछली बार सपा प्रत्याशी रहे सर्वराज सिंह ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। उनके कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की संभावना है। पिछली बार बसपा से चुनाव लड़ी सुनीता शाक्य के पति सिनोद शाक्य उर्फ दीपू ने अभी भी टिकट की आस नहीं छोड़ी है। सपा-बसपा गठबंधन के पिछली बार मिले वोटों को जोड़ दें तो धर्मेंद्र कश्यप को मिले 409533 वोटों के मुकाबले 461161 वोट होते हैं, जो 51628 अधिक होते हैँ। कुल मिलाकर सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा प्रत्याशी को कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें