बरेली। प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) की परीक्षा विवादों में घिर गई है। हिंदी की परीक्षा में कई प्रश्नों के दो-दो सही विकल्प दे दिए गए। एक में विकल्प ही गलत दे दिया। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति भी दर्ज कराई। भ्रम की स्थिति होने पर कई ने सवाल ही छोड़ना उचित समझा। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग की परीक्षाओं पर पहले भी विवाद हो चुके हैं। कभी सवालों को लेकर तो कभी मूल्यांकन और रिजल्ट को लेकर विवाद हुए हैं।
गुलाबराय इंटर कॉलेज में हिंदी के शिक्षक डॉ. गोविंद दीक्षित के अनुसार हिंदी के कई प्रश्नों में दो-दो विकल्प सही दिए गए। एक सवाल में सूफी कवि नूर मोहम्मद की रचना के बारे में पूछा गया। इसके पद्मावत, अनुराग बांसुरी, चंद्रावती, इंद्रावती के विकल्प दिए गए। इसमें अनुराग बांसुरी और इंद्रावती दोनों ही रचनाएं नूर मोहम्मद की है। इसी तरह हिंदी को राजभाषा के रूप मान्यता कब मिली पर सवाल पूछा गया। इसका सही विकल्प 14 सितंबर 1949 था, जोकि विकल्प में दिया ही नहीं गया। डॉ. दीक्षित का कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में इस तरह की गलती होना बड़ा सवाल है।
पहले दिन 45 फीसदी ने छोड़ी परीक्षा
पहले दिन 45 फीसदी अभ्यर्थियों ने टीजीटी की परीक्षा छोड़ दी। पहली पाली में 13 सेंटर बनाए गए थे। जहां 6437 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिसमें 3802 ने परीक्षा छोड़ दी। करीब 59 फीसदी ने ही परीक्षा दी। दूसरी पाली में 11 केंद्रों पर 5376 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिसमें 2043 ने परीक्षा छोड़ी। करीब 52 फीसदी अभ्यर्थी उपस्थित रहे। टीजीटी की परीक्षा शनिवार को भी होगी। शनिवार को सुबह की पाली में 14 और दूसरी पाली में 16 केंद्र बनाए गए हैं। प्रथम पाली में 7022 और दूसरी पाली में 8158 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं।