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शस्त्र की दुकानों पर विरासत के हथियारों का जखीरा

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बरेली। उत्तराधिकारी के नाम लाइसेंस न ट्रांसफर होने पर बड़ी तादाद में हथियार शस्त्र दुकानों पर जमा हैं। किस दुकान पर कितने शस्त्र जमा हैं, प्रशासन के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है। चुनाव में इन हथियारों के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने शस्त्र विक्रेताओं को नोटिस देकर यह रिकार्ड जुटाना शुरू कर दिया है।
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प्रशासन के रिकार्ड के अनुसार जिले भर में करीब 36 हजार शस्त्र लाइसेंस हैं। 24 विक्रेताओं को शस्त्र बिक्री की अनुमति दी गई है। इन दुकानदारों अपनी सुपुर्दगी में शस्त्र जमा रखने की भी छूट है। सूत्रों के मुताबिक लाइसेंसधारक की मौत के बाद सैकड़ों की तादाद में ऐसे शस्त्र हैं, जिन्हें उत्तराधिकारी के नाम ट्रांसफर होना है। कुछ मामले में उत्तराधिकारियों के बीच विवाद भी है। इसके चलते उनके लाइसेंस का ट्रांसफर होने की प्रक्रिया अधर में है। तमाम लोग ऐसे भी हैं, जो विरासत में मिले शस्त्रों को रखना ही नहीं चाहते। ऐसे हथियार लंबे समय से दुकान पर जमा हैं और बिक भी नहीं रहे हैं। चूंकि इनके लाइसेंस नवीनीकृत या ट्रांसफर नहीं हुए हैं। इसलिए वे अवैध हो चुके हैं। इन्हें थाने या शस्त्र विक्रेता की सुरक्षा में रख दिया गया है। मगर इनका रिकार्ड कलक्ट्रेट के शस्त्र अभिलेखागार के पास नहीं है। ऐसे में चुनाव को नजदीक देख सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने सभी दुकानदारों को नोटिस जारी कराना शुरू किया है ताकि उनका रिकार्ड बनाया जा सके।

थाने के बजाय दुकान पर शस्त्र रखने को प्राथमिकता
लाइसेंसधारक की मृत्यु होने या लाइसेंस अवैध होने के बाद विरासत में दर्ज न होने तक शस्त्र को थाने या शस्त्र विक्रेताओं के पास जमा करना होता है। दुकानदार शस्त्रों को रखने के लिए किराया और बीमा की रकम भी लेते हैं। मगर पुलिस इसका कोई चार्ज नहीं लेती। चूंकि पुलिस मालखाने में शस्त्रों की कोई देखरेख नहीं होती, इसके चलते लोग दुकानों पर जमा करना पसंद करते हैं। विरासत में फंसे होने वाले ज्यादातर हथियार सिंगल और डबल बैरल बंदूकों के हैं क्योंकि इनका क्रेज कम होे गया है। अब लोग पिस्टल और राइफल लेना चाहते हैं।
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चुनाव को देखते हुए शस्त्रों का रिकार्ड तैयार होना है। इसलिए यह सूचना मांगी जा रही है कि शस्त्र विक्रेताओं के पास कितने शस्त्र जमा हैं। दुकानदारों के पास मौजूद वर्षों पुराने शस्त्रों को पुलिस के हवाले कर दिया जाए। - संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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