बरेली। एक तरफ खतौनियों के डिजिटाइजेशन न होने से भू-माफियाओं पर शिकंजा नहीं कस रहा है, वहीं जमीनों के नक्शों को भी ऑनलाइन करने का काम पूरा नहीं हो सका है। कांट्रेक्ट लेने वाली कंपनी इसे पूरा करने में देरी कर रही है। इसके चलते तहसील सदर में करीब चार सौ गांवों के नक्शा रिकार्ड फीडिंग में जो गड़बड़ियां पकड़ी गईं थीं, उन्हें अब तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है।
फरीदपुर और नवाबगंज में जमीन के घोटाले में यह सामने आया है कि राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मिलकर खतौनियों में फर्जी इंद्राज करा रहे हैं। इससे भू-माफियाओं को गड़बड़ी करने का पूरा मौका मिल रहा है। मगर डिजिटाइजेशन को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। खतौनियों की तरह ही करीब साल भर से जमीनों के नक्शों को ऑनलाइन करने का काम अधर में लटका है। कमिश्नर दफ्तर में 2116 गांवों के जमीन के नक्शों का काम एक आउट सोर्सिंग कंपनी से कराया जा रहा है। अब तक यह काम पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन ढिलाई के चलते जमीन के रिकार्ड को ऑनलाइन नहीं किया जा पा रहा है। इसमें देरी की एक वजह कंपनी स्टाफ द्वारा सदर तहसील के करीब चार सौ गांवों के जमीन के रिकार्ड की गलत फीडिंग भी है। इसको लेकर कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने काफी नाराजगी जाहिर की थी।
कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने कहा कि नक्शों की फीडिंग का काम अभी काफी बकाया है। इसके लिए कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसे जल्द से जल्द पूरा करा लें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।