बरेली। ‘जै जै हो बदरीनाथ, जै हो काशी केदारा’ ‘ओ नंदा सुनंदा तू दैण है जये’ जैसे लोकगीतों से देव वंदना कर शनिवार को उत्तरायणी मेले का शुभारंभ हुआ। कलाकारों ने देवभूमि की अद्भुत संस्कृति का प्रदर्शन किया। एक बार फिर पर्वतीय संस्कृति के कई रंगों से रूबरू कराने के लिए उत्तरायणी जनकल्याण समिति द्वारा रंगयात्रा से मेले का शुभारंभ हुआ।
सुबह करीब साढ़े दस बजे रंगयात्रा शुरू हुई। जो अंबेडकर पार्क, कोतवाली, पटेल चौक, चौकी चौराहा, सर्किट हाउस से बरेली क्लब ग्राउंड पहुंची। रंगयात्रा की शुरूआत गोलू देवता के आशीर्वाद और तिलक लगाकर हुई। फिर एडीजी प्रेम प्रकाश ने रंगायात्रा का शुभारंभ किया। जिसमें मां नंदादेवी के पीछे छोलिया की टीम ने जोश भरा। मशकबीन और रणसिंघा की गगनभेदी तान, लोकगीतों, लोक नृत्यों संग रंगयात्रा मेला स्थल पहुंची। स्कूलों का बैंड, छात्राओं ने स्त्री सशक्तिकरण और बेटी बचाओ के प्रति शहरवासियों को जागरूक किया। शोका समाज ने भी प्रस्तुति दी। पारंपरिक परिधान पिछौड़ा में सजी महिलाओं ने कुमाऊंनी संस्कृति की छटा बिखेरी। मेले का उद्घाटन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने किया।
बिखरी पहाड़ की छटा
रंगयात्रा के बाद मंच पर गढ़वाल और कुमायूं के लोकनृत्य और गीतों ने धूम मचा दी। झोड़ा, चांचरी, छपेली गीतों की धूम रही। मेले में करीब 125 स्टॉल्स पर पहुंचकर शहरवासियों ने कपड़े, आर्टिफिशियल ज्वैलरी और घर की सजावट के सामान खरीदे। यहां कुमायूं का आचार, सिंगौड़ी, बाल मिठाई, गढ़वाल की दाल और मसालों के स्टॉल सजे हैं। जयपुर के चूरन, कोलकाता का काथा वर्क, देहरादून की खादी, चमकौर की सूखी डंाग, रुद्रपुर के मसाले और उत्तराखंड कुटीर उद्योगों के स्टॉल पर लोगों ने खूब खरीदारी की।
मंच पर हुई प्रस्तुतियां
जीवन राम की टीम द्वारा छोलिया नृत्य, खटीमा की जयपूर्णागिरी देवभूमि उत्थान समिति, लोकगीतों के सुपरस्टार अमित सागर, विपिन देव के नेतृत्व में टीम, लोकगायिका खुशी जोशी समेत मंच पर दर्जन भर से अधिक प्रस्तुतियां हुईं। इस दौरान स्मारिका का विमोचन आईआरएस संयुक्त आयकर आयुक्त एसबी सिंह ने किया। यहां अध्यक्ष पीसी पाठक, वरिष्ठ सचिव भूपाल सिंह, महामंत्री भुवन पांडे, रमेश चंद्र शर्मा, मेला प्रभारी विपिन वर्मा, सलाहकार एनडी पांडेय, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, भूपाल सिंह आदि का सहयोग रहा।