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सत्ता की ताकत से ‘गोली’ मारें ये गलियों के ‘शूटर’

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बरेली। शस्त्र लाइसेंस के आवेदनों में लगाए गए शूटरों के प्रमाण पत्रों पर सवाल उठाकर जांच कराने का मामला तूल पकड़ गया है। क्वालीफाइड शूटर्स ने इस मामले में स्टेट राइफल एसोसिएशन और राइफल क्लब के पदाधिकारियों पर सीधा निशाना साधा है। क्वालीफाइ़ड शूटर्स का आरोप है कि वे तो 15 साल तक मेहनत करने के बाद स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप खेल पाए, लेकिन सत्ता की ताकत के जरिये जो लोग एसोसिएशन में पदाधिकारी बने बैठे हैं, वे बताएं कि उन्होंने या उनके परिवार के लोगों ने कितनी स्टेट या नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप खेली हैं।
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बरेली राइफल क्लब से जुड़े दर्जनों शूटर बृहस्पतिवार को क्लब पहुंचे और शस्त्र लाइसेंस के आवेदनों में लगाए गए प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की बात कहते हुए आक्रोश जताया। उनका कहना था कि स्टेट राइफल एसोसिएशन और बरेली क्लब में ऐसे मेंबर हैं जो ठीक से बंदूक पकड़ना तक नहीं जानते। सत्ता की ताकत से वह खुद तो एसोसिएशन में पदाधिकारी बन गए, लेकिन अब उन शूटरों की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं जो 10-15 साल मेहनत कर स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप खेले हैँ। शूटर देवव्रत चौधरी ने कहा कि राइफल क्लब में तीस साल से जमे मेंबरों ने हमेशा शूटरों का कैरियर खत्म किया है। किसी अच्छे शूटर को आगे नहीं बढ़ने दिया। मुस्तजाब रजा खान का आरोप था कि राइफल क्लब के मेंबरों को खुद ही शूटिंग के बारे में कुछ नहीं पता। वे बरसों से न चुनाव होने दे रहे हैं, न पद छोड़ रहे हैं जबकि नियमानुसार राइफल क्लब की सदस्यता के लिए हर तीन साल में चुनाव होने चाहिए। कम से कम आधे पदों पर ऐसे मेंबर होने चाहिए जो खुद स्टेट या नेशनल चैंपियनशिप खेल चुके हों। उन्होंने कहा कि सत्ता की दखलंदाजी से हर बार चुनाव टल जाता है और बरसों से जमे मेंबर या पदाधिकारी ही पदों पर काबिज रहते हैं। इस वजह से न क्लब में सुविधाएं विकसित हो पा रही हैं न नए शूटर पैदा हो रहे हैं। पुराने शूटर भी परेशान होकर दूसरे राज्यों का प्रतिनिधित्व करने को मजबूर हैं।

शूटिंग ग्राउंड में बंधती हैं भैंस शूटर दानिश अहमद का कहना है कि शूटिंग ग्राउंड का वह हिस्सा जहां स्कीड हाई हाउस है। यहां से मिट्टी की उड़ती हुई डिश पर शूटर निशाना लगाता है। उस स्कीड हाउस की स्थिति यह है कि वहां बरसों से सफाई नहीं हुई। वहां भैंस बंधती है। क्लब में निशाना लगाने वाली मशीनें आउटडेटेड हो चुकी हैं। फुरकान अली बोले- क्लब में शूटरों की प्रैक्टिस के लिए दो बंदूकें मंगाई गईं, जिनकी कीमत ढाई लाख थी। उनकी कीमत 12.5 लाख दिखाकर बजट में बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया। इस हाल में खिलाड़ी ओलंपिक तो छोड़ो, स्टेट या नेशनल भी नहीं खेल पाएंगे।
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ये हैं क्लब के संरक्षक
लेफ्टिनेंट किशन लाल
सेठ हरनाम दास
अख्तर अली उर्फ अमीर मियां
एमवाई अली नश्तर
कैप्टन अमरनाथ गुप्ता
अजयपाल सिंह चौहान एडवोकेट
काजी लईक अहमद
देवेंद्र मोहन चौधरी
साहब जादा ममनून हुसैन

सत्ता की ताकत.. नेता भी बन गए मेंबर
ओमपाल सिंह पूर्व प्रधान
महिपाल सिंह यादव पूर्व विधायक सपा
राजेश सिंह यादव पूर्व डीजीसी
साहबजादा खुर्शीद हुसैन पूर्व ब्लॉक प्रमुख भोजीपुरा
जगमोहन सिंह यादव ब्लॉक प्रमुख भुता
मुजाहिद हसन खां पूर्व विधानसभा प्रत्याशी कैंट
वीरपाल सिंह यादव पूर्व सांसद सपा
अमित राज सिंह यादव पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव के बेटे

जो खुद को स्टेट या नेशनल शूटर कह रहे हैं, बेहतर है कि वे अपने शूटर होने का प्रमाणपत्र क्लब में जमा कर दें क्योंकि सिटी मजिस्ट्रेट ने भी प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के लिए क्लब से कहा है। राइफल क्लब उनका सत्यापन करा देगा। हमने यह नहीं कहा कि वे शूटर नहीं है। केवल इतना कहा कि हम उनको जानते नहीं। जहां तक मेरे शूटर होने पर सवाल खड़ा करने की बात है तो मेरी तो शूटिंग करना हॉबी रही है। महिपाल सिंह यादव, संरक्षक राइफल क्लब एवं प्रदेश उपाध्यक्ष स्टेट एसोसिएशन
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