बरेली। लाल फाटक फोरलेन ओवरब्रिज प्रोजेक्ट भले ही समय पर पूरा न हो पाए, लेकिन अफसर नेताजी को ‘खुश’ रखकर जमकर रकम एेंठने में लगे हैं, क्याेंकि कभी सर्विसलेन तो कभी बिजली लाइनें शिफ्ट करने के नाम पर लूट ही हो रही है। निर्माण कार्य में घपले किसी से छिपे नहीं हैं। दो वर्ष पहले इसकी आधारशिला रखी गई, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अब तक न तो सर्विस रोड बनाकर जाम का हल निकाला गया है और न ही सेना से एनओसी मिल पाई है।
बगावत: छुट्टी के दिन स्टाफ को
मनाया- अब तो कर लो काम
बरेली। विवादों में घिरी सेतु निगम इकाई-2 में बगावत चर्चा में बनी हुई है। इसकी गूंज मुख्यालय तक पहुंचने के बाद बुधवार को अवकाश के दिन कार्यालय खुला और बगावत करने वाले इंजीनियर और अन्य स्टाफ को बुलाया गया। दिन भर सुलह पर चर्चा हुई, लेकिन अपने अफसर के मनमाने रवैये और दबाव देकर नियम विरुद्ध काम कराने से क्षुब्ध स्टाफ ने अपने कदम पीछे करने से इंकार कर दिया। बताया जाता है कि इस मुहिम में कुछ और कर्मी भी शामिल हो गए हैं।
एमडी उत्तम कुमार गहलोत की समीक्षा बैठक से लौटे वरिष्ठ अफसर बगावत पर उतरे स्टाफ को मनाने में जुट गए हैं। इसके लिए अवकाश में कार्यालय भी खोला गया, निर्माण कार्य की समीक्षा की जगह अधीनस्थों को मनाने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। अफसरों ने समझाया कि इस प्रकरण से इकाई-2 बदनाम हो रही है, मामला ऊपर तक चर्चा में है। धमकाया, अगर बगावत से बाज नहीं आए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इकाई-2 प्रभारी नवाब सिंह के रवैये से नाराज स्टाफ ने साफ कह दिया कि हमें हटा दिया जाए। अपमान सहकर कार्य नहीं करेंगे। अच्छा काम करने पर भी अधीनस्थों के खिलाफ जांच कराने में खुद इकाई-2 प्रभारी शामिल हैं। दिन भर चला सुलह प्रकरण शाम तक बेनतीजा ही रहा।
पॉवर कारपोरेशन अफसर बताएं
सवा दो करोड़ का काम एक साल बाद मात्र 60 लाख मेें होगा कैसे
- सेतु निगम ने सवा दो करोड़ का पुराना एस्टीमेट छिपाकर नया बनवाया तो
1.65 करोड़ का अंतर देख चीफ का सिर चकराया, एसई को जांच सौंपी
बरेली। लाल फाटक पर बन रहे फोरलेन ओवरब्रिज प्रोजेक्ट निर्माण में समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब लाइन शिफ्ंिटग विवाद सामने आया है। संबंधित एसडीओ ने 17 माह में दूसरी बार जब एस्टीमेट बनाया तो घटकर एक तिहाई से भी कम रह गया। चीफ इंजीनियर ने इसे विभागीय राजस्व की क्षति मानते हुए गड़बड़ी की जांच शुरू करा दी है। इससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
बिजली विभाग में इन दिनों कोई नियम-कानून नहीं है। लाइन, ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग हो या फिर अस्थाई/ स्थाई नए कनेक्शन लेने के मामले। अगर आपकी सेटिंग है तो काम औने-पौने में हो जाएगा, अन्यथा विभाग में चक्कर लगाते-लगाते चप्पल घिस सकती हैं। यह मनमानी सरकारी मामलों में भी हो रही है। नाथनगरी एयर टर्मिनल परिसर से लाइन शिफ्ंिटग और नए कनेक्शन का मामला अभी तक नहीं सुलझा है कि लाल फाटक ओवरब्रिज में बाधा बनी बिजली लाइन और ट्रांसफार्मर शिफ्ंिटग के एस्टीमेट में गड़बड़ी सामने आ गई है। एसडीओ आशीष राहुल ने बीते वर्ष इस कार्य का एस्टीमेट करीब दो करोड़ 68 हजार रुपये का बनाया था, पहली जुलाई से जीएसटी लगने से सवा दो करोड़ रुपये पहुंच गया। अब उनके स्तर से 17 माह बाद संशोधित एस्टीमेट 59.10 लाख कर दिया गया। इस तरह करीब 1.65 करोड़ रुपये अंतर पकड़ में आने पर खलबली मची हुई है। चीफ इंजीनियर एसके सक्सेना इसे देखकर खुद चकरा गए और जवाब मांगा तो संबंधित अफसर बगले झांकने लगे। इतनी बड़ी राशि कम कराने के पीछे कौन है और ऐसा क्यों किया गया?
बताया जाता है कि इकाई-2 प्रभारी ने पुराने एस्टीमेट का तथ्य छिपाकर नया एस्टीमेट बनवाया था, इसमें सेतु निगम ठेकेदार की भूमिका भी बताई जाती है। बताया जाता कि एसडीओ और जेई ने मिलकर यह बड़ा घोटाला किया है। नए एस्टीमेट में विस्तृत मद और खर्च का ब्योरा भी नहीं है। इसलिए मामला संदिग्ध माना जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि इन दोनों ने एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारी को गुमराह कर काउंटर साइन करा लिए हैं।
सर्विस लेन निर्माण में भी घपला
बरेली। फोरलेन ओवरब्रिज बनने से पहले ही सर्विस लेन निर्माण के लिए 2.65 करोड़ रुपये बजट जारी किया गया था। सेतु निगम ने इसका ठेका भी दिया और करीब 75 लाख रुपये लागत से पत्थर आदि डालकर दोनों ओर समतलीकरण कराया। बताया जाता है कि ठेकेदार को बमुश्किल करीब 17 लाख रुपये भुगतान किया गया, जबकि मुख्यालय से पूरी धनराशि जारी हुई। बाकी बची राशि के बंदरबांट की चर्चा है, क्योंकि भुगतान नहीं मिलने पर ठेकेदार ने काम करने से इंकार कर दिया, जबकि विभागीय अफसर यह प्रचार करने में लगे हैं कि ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया है। बजरी, रेता, पत्थर, सीमेंट और सरिया आदि की खपत, खरीद और सप्लाई पर भी उंगली उठने लगी हैं। कुल मिलाकर अफसर और नेताजी मिलकर जमकर घोटाला करने में लगे हैं।